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दारानगर का दो दिवसीय ऐतिहासिक कुप्पी युद्ध आज से

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Daranagar's two-day historic flask war begins today - फोटो : KAUSHAMBI
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दारानगर कस्बे के ऐतिहासिक रामलीला महोत्सव व दशहरा मेला का मुख्य आकर्षण दो दिवसीय कुप्पी युद्ध रविवार और सोमवार को आयोजित होगा। राम-रावण दल के बीच होने वाले इस ऐतिहासिक 241वें कुप्पी युद्ध की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। म्योहरा के गढ़ी गांव में कुप्पी युद्ध मैदान को तैयार करने के लिए दिन रात काम चल रहा है। कोरोना काल में आयोजित हो रहे कुप्पी युद्ध में कोविड-19 नियमों का पालन करने के लिए इंतजाम किए गए हैं।
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ऐतिहासिक कस्बा दारानगर में 241 वर्ष से लगातार रामलीला महोत्सव एवं दशहरा मेला का आयोजन होता है। इस वर्ष कोविड-19 के चलते तमाम तरह के धार्मिक आयोजन नहीं हो सके। इसके बावजूद दारानगर कस्बे की रामलीला अपनी पूरी मौलिकता एवं परंपरागत तरीके से आयोजित हो रही है। 12 दिवसीय रामलीला महोत्सव व दशहरा मेला में हर रोज लीला स्थल बदल जाता है। दारानगर व उसके आसपास के कई गांव में रामायण से जुड़ी लीला का मंचन होता है।
कस्बे की रामलीला का मुख्य आकर्षण दो दिवसीय कुप्पी युद्ध होता है। इस बार कुप्पी युद्ध रविवार और सोमवार को होगा। इस अनोखे और रोमांचकारी कुप्पी युद्ध को देखने के लिए हजारों की तादाद में भीड़ जुटती है। म्योहरा गांव के गढ़ी स्थित मैदान में राम-रावण दल के बीच होने वाले युद्ध की तैयारियों में शनिवार को कमेटी के पदाधिकारी लगे रहे।
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कमेटी के अध्यक्ष आद्या प्रसाद पांडेय ने बताया कि रोमांचकारी कुप्पी युद्ध में राम दल की सेना लाल व रावण दल के सेनानी काले वस्त्रों में होंगे। पहले दिन दोनों सेनाओं के बीच 10-10 मिनट के चार व दूसरे दिन तीन युद्ध होंगे। युद्ध के बीच में ही लक्ष्मण मेघनाथ युद्ध, लक्ष्मण शक्ति लीला, सती सुलोचना आदि लीला का मंचन होगा है। बताया कि इस बार कोरोना वायरस के चलते आयोजन में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। कोविड नियमों के तहत कुप्पी युद्ध से पहले पूरे मैदान को सैनिटाइज कराया जाएगा। मैदान में मास्क लगाकर सेनानी युद्ध करेंगे।
दोनों तरफ से मैदान में उतरेंगे 25-25 सेनानी
रामलीला कमेटी के अध्यक्ष आद्या प्रसाद पांडेय का कहना है कि इतना लंबा वक्त गुजरने के बावजूद दारानगर के कुप्पी युद्ध का सजीव रूप कायम है। युद्ध बस्ती से सटे बड़े मैदान में होता है। हर साल की तरह इस बार भी मैदान को बल्लियों से घेरकर बैरिकेडिंग कर दी गई है। दरअसल युद्ध के दौरान भीड़ इतनी बेकाबू हो जाती है कि उसे संभाल पाना मुश्किल हो जाता है। मैदान में राम-रावण दल के सेनानी प्लॉस्टिक की कुप्पी से वास्तविक युद्ध करते हैं। दो दिन में सात लड़ाई दोनों दलों के बीच होती है। पहले दिन यानी रविवार को चार चरणों में लड़ाई होगी। परंपरा के मुताबिक पहले दिन की चारों लड़ाई में रावण की सेना श्रीराम की सेना पर भारी पड़ती है और उन्हे हराने का पूरा प्रयास करती है। जबकि दूसरे दिन तीन लड़ाई होगी। तीनो लड़ाई जीत कर राम की सेना विजयी होती है। युद्ध के मैदान में दोनों दल के 25-25 सेनानी आमने-सामने होते हैं।
रण क्षेत्र की मिट्टी लगाकर ठीक होते हैं घायल सेनानी
कड़ा। युद्ध इतना विकराल होता है कि देखने वालों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। युद्ध में घायल होने वाले सेनानी इलाज कराने के बजाय रण भूमि की मिट्टी को दवा के रूप में लगाते हैं। सेनानी बताते हैं की युद्ध में शामिल होना उनके लिए गौरव की बात है। कुप्पी युद्ध का रोमांच ही ऐसा होता है की इसे देखने के लिए दर्शक खुद ब खुद मैदान में खिंचे चले आते हैं।
एकादशी को होगा रावण का प्रतीकात्मक वध
कड़ा। दशहरा महोत्सव तो पूरे देश में अलग-अलग स्थानों पर मनाया जाता है। सभी स्थानों पर एक समानता ये है कि रावण का वध दशमी को होता है। जबकि दारानगर के ऐतिहासिक रामलीला महोत्सव में रावण वध का प्रतीकात्मक एकादशी को होता है। कमेटी के संरक्षक मूल प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि प्रतीकात्मक वध करने के पीछे भी एक परंपरा का निर्वहन किया जाता है।

Daranagar's two-day historic flask war begins today- फोटो : KAUSHAMBI

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