फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kaushambi News: यूरिया के लिए उमड़ी किसानों की भीड़, कर्मचारियों के हाथ पैर फूले

विज्ञापन
अजुहा स्थित साधन सहकारी समिति में यूरिया के लिए लगी किसानों की भीड़ - फोटो : KAUSHAMBI
विज्ञापन
अजुहा। साधन सहकारी समिति अजुहा में यूरिया लेने के लिए किसानों की भीड़ उमड़ पड़ी। जबकि उपलब्धता इतनी नहीं थी कि सभी को खाद मिल सके। भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही थी। लोगों में आक्रोश बढ़ता देख सचिव व अन्य कर्मचारियों के ठंड में पसीना छूट गया। पुलिस बुलानी चाही, लेकिन मदद नहीं मिली। किसी तरह समझा बुझाकर शांत कराया गया।
विज्ञापन

इस वक्त यूरिया का संकट चल रहा है। किसानों को गेहूं की फसल में खाद डालनी है, लेकिन सरकारी गोदामों में जरूरत के हिसाब से उपलब्ध नहीं है। साधन सहकारी समिति अजुहा में पांच दिसंबर के बाद से गोदाम खाली चल रहा था। आसपास के किसान रोज साधन सहकारी समिति के चक्कर लगा रहे थे। बताया जाता है कि 18 दिसंबर को 400 बोरी यूरिया आई। इसके अगले दिन सचिव हुकुम चंद्र विभागीय बैठक में शामिल होने चले गए। इससे 19 दिसंबर को वितरण नहीं हो सका। यूरिया आने की खबर किसानों को मिल चुकी थी। लिहाजा मंगलवार की सुबह से ही किसान साधन सहकारी समिति पहुंचने लगे।
करीब 10 बजे सचिव के पहुंचने तक समिति पर सैकड़ों किसानों की भीड़ लग चुकी थी। उन्होंने आधार कार्ड जमा कराना शुरू किया। दो घंटे के अंदर ही 150 आधार कार्ड एकत्र हो गए। किसानों के बीच धक्कामुक्की होने लगी। गहमागहमी देख कर्मचारियों के हाथ पैर फूल गए। कहीं विवाद न हो जाए, इसलिए पुलिस की मदद लेनी चाही। कर्मचारी अजुहा चौकी पहुंचे तो पता चला कि फोर्स अवैध शराब पकड़ने के दबिश में गई है। वहां से लौटना पड़ा। सचिव ने किसानों को समझाबुझाकर शांत कराया। कहा कि 150 कार्ड जमा हुए हैं। इन किसानों को दो-दो बोरी यूरिया दी गई। सचिव ने बताया कि 400 बोरी खाद और आनी है। बुधवार को उसका वितरण किया जाएगा।
विज्ञापन

साधन सहकारी समिति से खाली हाथ लौटे अजुहा के अवनीश मौर्य, पिंटू, दिनेश यादव, छंगू का पुरवा के हरिश्चंद्र ने नाराजगी जताई। कहा कि निजी दुकानों में खाद है, लेकिन उसके दाम अधिक हैं। ऊपर से गुणवत्ता पर भी पूरा भरोसा नहीं किया जा सकता। जबकि साधन सहकारी समिति की खाद भरोसेमंद रहती है। यही कारण है कि किसान इसे प्राथमिकता देते हैं। यह जानते हुए भी समितियों में पर्याप्त खाद उपलब्ध नहीं कराई जाती।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें