सदर कोतवाली पुलिस की कस्टडी से फरार मुलायम सिंह की लाश फांसी पर लटकी मिलने के बाद हुए बवाल ने तीन गांवों के लोगों का सुख-चैन छीन लिया है। हो, भी क्यों न। इंस्पेक्टर मंझनपुर की तहरीर पर दर्ज एक मामले में तीनों गांवों के 279 लोगों को नामजद जो किया गया है। इनमें से 250 के साथ नफर (अज्ञात) शब्द जोड़ा गया है। ऐसे में ग्रामीणों को हर पल पुलिस की गिरफ्तारी का खतरा सता रहा है।
सदर कोतवाली के बहादुरपुर गांव के मुलायम सिंह पर पड़ोस की एक लड़की को भगा ले जाने का आरोप था। घटना की रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस आरोपी युवक को तलाश कर रही थी। रविवार को मुलायम गांव पहुंचा तो प्रधान के कहने पर उसे कोतवाली पुलिस के हवाले किया गया। इस बीच मुलायम कस्टडी से भाग निकला और सोमवार को बहादुर गांव के समीप उसकी लाश पेड़ पर फांसी से लटकी मिली। घटना को लेकर मंगलवार को गांव में पुलिस और ग्रामीणों के बीच जमकर संघर्ष हुआ। सात पुलिस कर्मियों को चोटें आई। इस मामले में पुलिस को हवाई फायरिंग तक करनी पड़ी थी। मामले में कोतवाल उदयवीर सिंह की तहरीर पर जो रिपोर्ट दर्ज कराई गई है उससे ग्रामीणों की नींद उड़ी है।
खासकर युवा वर्ग गांव छोड़कर पलायन कर गया है। कोतवाल की तहरीर पर सदर कोतवाली पुलिस ने धारा 147, 148, 149, 332, 336, 353, 341, 504 और 7 क्रिमनल एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत किया है। जिसमें बहादुरपुर गांव के निजामुद्दीन सहित 15 अज्ञात, ओसा के जीतेंद्र पाल सहित आठ अज्ञात, सिरचनपुर के बच्चा लोधी सहित तीन अज्ञात और 250-300 अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज किया गया है। ऐसे में तीनों गांवों के लोग पलायन किए हुए हैं। बुधवार को ईद की व्यस्तता के कारण रात को पुरुष गांव लौटे लेकिन भोर में ही वह फिर गोपनीय ठिकाने पर चले गए हैं। तीनों गांवों की गलियों में सन्नाटा है। पेड़ के नीचे ताश के पत्ते फेंटने वाले लोग भी नहीं दिख रहे हैं। ज्यादातर घरों में दरवाजे जरूरी काम से ही खुलते हैं।