यमुना नदी के औधन घाट पर मंगलवार को हुए बवाल के लिए अफसरों की अनदेखी
जिम्मेदार है। घाट पर मशीनों से बालू खनन को लेकर मांझी और मजदूर महीनों से
परेशान थे। तहसील और कलेक्ट्रेट तक इसके खिलाफ वे हुंकार भर चुके थे,
लेकिन अफसरों ने घाट पर मशीनों के इस्तेमाल पर रोक लगाने में गंभीरता नहीं
दिखाई। इसी अनदेखी से घाट पर फायरिंग, आगजनी आदि घटनाएं हुईं।
बता दें
कि कौशाम्बी में यमुना नदी पर बालू खनन के दो दर्जन से अधिक घाट हैं। इनमें
ज्यादातर घाटों पर रोक के बाद भी धड़ल्ले से ठेकेदार मशीनों से खनन करा
रहे हैं। जबकि घाट पर मशीनों के खनन को लेकर बरसों से मजदूरों और ठेकेदार
आमने-सामने होते रहे हैं। कई बार घाटों पर इसे लेकर पहले भी खूनी संघर्ष हो
चुका है। फिर भी अफसर और इलाकाई पुलिस घाट पर जेसीबी, पोकलैंड, पनचक्की के
इस्तेमाल को बंद कराने में दिलचस्पी नहीं दिखाते हैं। इसे लेकर खनन का
मौसम शुरू होते ही यमुना तराई सुलगने लगती है। इस बार भी औधन समेत ज्यादातर
घाटों पर धड़ल्ले से मशीनों से खनन कराया जा रहा है। औधन, मैनापुर, सैदपुर
आदि घाटों पर जेसीबी, पोकलैंड से खनन को लेकर 9 फरवरी को मजदूरों ने चायल
तहसील में प्रदर्शन किया था।
वहीं दो दिन बाद कलेक्ट्रेट में भी लालसलाम के
कार्यकर्ताओं ने हुंकार भरी थी। डीएम को प्रार्थनापत्र देकर घाट से मशीनों
को हटवाने की मांग की थी। पर, अफसरों ने मजदूरों की शिकायत पर गंभीरता
नहीं दिखाई। वहीं कार्रवाई नहीं होने से बेखौफ ठेकेदार मनमानी पर उतारू हो
गए। जिसके कारण मंगलवार को औधन घाट में मजदूरों पर दिनदहाड़े गोलियां
बरसानी शुरू कर दी गईं। इससे भड़के मजदूरों ने भी हथियार लेकर घाट पर आ
डटे। लाठी-डंडे हथियारों से लैश मजदूरों ने ठेकदारों से मोर्चा लेते हुए
उन्हें घाटों से खदेड़ा, बल्कि पोकलैंड, पनचक्की को आग के हवाले भी कर
दिया।