तीन जुलाई को इलाहाबाद में बदमाशों की गोली का निशाना बने अधिवक्ता सुमित पांडेय ने 23 दिन जिंदगी और मौत से जूझने के बाद शनिवार को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। अधिवक्ता की मौत के चार दिन बाद भी हत्यारों की गिरफ्तारी नहीं होने पर बुधवार को मंझनपुर के अधिवक्ता काम बंद कर हड़ताल पर रहे। अधिवक्ताओं ने मंझनपुर कचहरी परिसर में प्रदर्शन कर हत्यारों की गिरफ्तारी व पचास लाख मुआवजे के साथ पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दिए जाने की मांग की।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे सुमित कुमार पांडेय को बदमाशों ने तीन जुलाई को गोली मार दिया था। जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। सुमित की 23 दिन जिंदगी और मौत से जूझने के बाद शनिवार को इलाज के दौरान लखनऊ के एक अस्पताल में मौत हो गई। घटना को लेकर अधिवक्ताओं ने आक्रोश जताया था। मौत के चार दिन बाद भी हत्यारों की गिरफ्तारी नहीं होने पर कौशाम्बी के अधिवक्ता काम काज बंद कर हड़ताल पर रहे।
कौशाम्बी मॉडल डिस्ट्रिक बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनुदेव त्रिपाठी के नेतृत्व में बुधवार को बैठक बुलाई गई। बैठक का संचालन कर रहे महांमत्री अजय कुमार पांडेय ने कहा कि सुमित की हत्या को लेकर पुलिस ने मामले में घोर अनियमितता बरती है। पुलिस मुख्य आरोपी को अभी तक गिरफ्तार नहीं कर सकी है। वकीलों ने मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी और मृतक सुमित के परिवार को पचास लाख रुपये मुआवजा के साथ-साथ परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दिलाए जाने की मांग की। चेतावनी दी कि यदि जल्द ही कोई कार्रवाई नहीं की गई तो वकील सड़क पर आंदोलन करेंगे। इस मौके हरि शंकर पांडेय, दिलीप पांडेय, शिव प्रसाद तिवारी, रमेश तिवारी, कौशलेद्र द्विवेदी, अवधेश पांडेय आदि अधिवक्ता मौजूद रहे।