कौशाम्बी में मूर्ति तस्कर गिरोह का भंडाफोड़
-शांतिदूत की नगरी से वाराह व पद्म प्रभु की मूर्ति बरामद
अंतर्जनपदीय तीन तस्कर गए दबोचे, दो पुलिस को चकमा देकर हुए फरार
15 लाख आंकी जा रही बरामद मूर्तियों की कीमत
अमर उजाला ब्यूरो
पश्चिमशरीरा(कौशाम्बी)। एसओजी के साथ पश्चिमशरीरा पुलिस ने बुधवार को अंतर्जनपदीय मूर्ति तस्करों के गिराह का भंडाफोड़ किया। पुलिस ने पकड़े गए तस्करों के कब्जे से भगवान विष्णु के दूसरे अवतार वाराह और पद्म प्रभु की मूर्ति बरामद किया। बरामद मूर्तियों की कीमत 15 लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस ने जांच पड़ताल के बाद पकड़े गए तस्करों को सलाखों के पीछे भेज दिया है।
शांति दूत की नगरी और तीर्थकर पद्म प्रभु की तपोस्थली कौशाम्बी अपराधियों का गढ़ बन गई है। मकान-दुकान के साथ भगवान के मंदिर भी सुरक्षित नहीं है। भगवान को उनके घर से उठा कर बाजारों में बेंचा जा रहा है। मंगलवार की रात एसओजी के साथ पश्चिमशरीरा पुलिस ने अर्तजनपदीय मूर्ति तस्करों के गिरोह का भाडाफोड़ किया। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने घेराबंदी करते हुए रंगई का डेरा पश्चिमशरीरा के समीप से मूर्ति तस्कर लवकुश पुत्र शिवपूजन निवासी नादिन का पुरवा मंझनपुर, विनीत सिंह पुत्र शिव भूषण निवासी रायपुर महेवाघाटऔर मोहम्मद राकिब पुत्र अजीमुल्ला निलवासी गढ़ी बाजार को धर दबोचा। पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार पांडेय ने बताया कि दोनों मूर्तियों की कीमत करीब 15 लाख रुपये है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इन्हीं मूर्तियों का दाम करोड़ों रुपये होगा। तस्कर मूर्ति बेचने की फिराक में थे। पकड़े गए तस्करों को सलाखों के पीछे भेज दिया गया है।
सौदेबाजी ने तोड़ा गिरोह का तिलस्म
-सरगना से गिरोह के एक सदस्य का हुआ था विवाद
अमर उजाला ब्यूरो
पश्चिमशरीरा(कौशाम्बी)। अर्तजनपदीय मूर्ति तस्करों के गिरोह का तिलस्म सौदेबाजी ने तोड़ दिया। बताया जा रहा है कि सरगरा से उसके सदस्य का पैसे के लेन-देन को लेकर विवाद हो गया। इसी के बाद से उसने गिरोह का भंडा फोड़ करने का मन बना लिया था। मौका पाते ही मंगलवार की रात पुलिस से मुखबिरी कर मूर्ति के साथ तीन सदस्यों को पकड़वा दिया। गिरोह का तिलस्म टूटने के बाद से इलाके में तमाम तरह की चर्चाएं है।
कौशाम्बी, फतेहपुर, प्रतापगढ़ और इलाहाबाद में सर्किय मूर्ति तस्करों की लंबी फौज है। पौराणिक मंदिरों से मूर्ति पार करने के बाद तस्कर उसे अन्य राज्यों में अच्छी कीमत पर बेंचते है। मंगलवार की रात पुलिस के हत्थे चढ़े मूर्ति तस्करों के गिरोह का तिलस्म गैंग ने ही तोड़ दिया। बताया जा रहा है कि पैसे के लेन-देन को लेकर गिरोह के सदस्य और सरगना के बीच विवाद हुआ था। सदस्यों के घर पर रखी चोरी की मूर्ति कब और कैसे बिकेगी इस बात की भनक गिरोह के हर सदस्य के पास रहती थी। विवाद के सरगना की चालबाजी नहीं और गिराह का तिलस्म टूट गया। चर्चा है कि गिरोह के ही सदस्य की मुखबिरी पर पुलिस ने भंडाफोड किया है। हलाकि पुलिस अफसर ऐसी किसी भी जानकारी से कतराते रहे। पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार पांडेय ने बताया कि पुलिस मामले की तहकीकात कर रही है। मर्ति तस्करों के सरगना राकेश उर्फ सरदार का किस सदस्य से विवाद हुआ था। पुरानी दोस्ती कैसे टूटी। इसे लेकर इलाके में तमाम तरह की चर्चाएं है। चर्चा तो यहां तक है कि एक-दूसरे को देख लेने की भी धमकियां दी गई थीं। सटीक मुखबिरी के जरिए मूर्ति तस्करों को पकड़ गया था। मूर्ति बेंचने के लिए पकड़े गए तस्कर पश्चिमशरीरा के रंगई का पुरवा गांव के समीप सड़क किे नारे रखी पान गुमटी पर चर्चा कर रहे थे। यहीं से ऐसी मुखबिरी की गई कि तस्कर पुलिस से नहीं बच सके और सलाखों के पीछे चले गए। गुमटी में कौन-कौन मौजूद था इसे लेकर भी चर्चा है। अर्तजनपदीय मूर्ति तस्करों का गिरोह फतेहपुर के सरगना राकेश उर्फ सरदार के इशारे पर काम करता था। किस पौराणिक मंदिर में कितनी कीमत की मूर्ति है इसकी जानकारी सरगना पहले कर लेता था इसके बाद वारदात को अंजाम देता था। कौशाम्बी के कई पौराणिक मंदिरों से मूर्तियां चोरी जा चुकी है। पौराणिक मंदिरों चोरी गई मूर्तियों को एक स्थान पर नहीं रखा जाता था। मंदिरों से मूर्ति पार करने के बाद सरगना के इशारे पर गिरोह का सदस्य उसे जिम्मेदारी से घर पर ही रख लेता था। सदस्य की यह भी जिम्मेदारी होती थी उसे कैसे बेंचना है। सौदेबाजी की जानकारी सरगना को देने के बाद ही मूर्ति बेंचीं जाती थी।
पांच पर दर्ज हुआ मूर्ति तस्करी का मामला
पश्चिमशरीरा पुलिस ने लवकुश, विनीत सिंह, मोहम्मद राकिब के साथ सरगना राकेश उर्फ सरदार और अजीत के खिलाफ मूर्ति तस्करी का मामला दर्ज किया है। पुलिस मुकदमा दर्ज करने के बाद सरगना की तलाश शुरू कर दी है। सरगना की तलाश में मंगलवार की रात कई संभावित ठिकानों पर दबिश दी गई थी पर, वह पुलिस के हत्थे नही चढ़ सका।
कौन है प्रीतम.....
पुलिस की सांठगाठ और सरगना से विवाद करने वाला प्रीतम आखिर कौन है। मूर्ति तस्करों के पकड़े जाने के बाद से इस नाम की चर्चा इलाके में जारों पर है। हालांकि पुलिस इस बाबत कुछ भी नहीं बता रही है। चर्चा तो यहां तक है कि पुलिस ने इस खुलासे में बडे़ पैमाने पर खेल भी किया है। नामजद अभियुक्तों के साथ दो अन्य भी पुलिस के हत्थे चढ़े थे। इन्हें क्यों छोड़ा गया....।