नशे के नाम पर पी रहे जहर
-दुकानों से तराई के मजदूरों को बेंची जा रही है स्प्रिट, अफसर बेखबर
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। गंगा-यमुना की तराई में बसे गांवों के मजदूर नशा के नाम पर जहर पी रहे हैं। स्प्रिट की दुकानों से सामान्य लोगों को मौत बेंची जा रही है। पैसे के अभाव में लोग बेखौफ होकर मौत को गले लगा रहे हैं। आबकारी विभाग के अफसरों की मेहरबानी से यह गोरखधंधा चल रहा है। शिकायत और जानकारी के बाद भी जिम्मेदार बेखबर हैं। इसका खामियाजा गरीब तबके के मजदूरों को भुगतना पड़ रहा है।
बौद्ध की तपस्थली इन दिनों मादक पदार्थ का गढ़ बन चुकी है। जिले में स्प्रिट की पांच दुकानें मंझनपुर, करारी, भरवारी, सिराथू और सरायअकिल में संचालित हैं। इन दुकानों से मेडिकल स्टोरों या फिर जरूरतमंदों को स्प्रिट बेंचने का प्राविधान है। मगर, दुकान संचालक ऐसा न करके नशेड़ियों को स्प्रिट बेंच रहे हैं। आबकारी विभाग की इस अनदेखी से तराई के लोग स्प्रिट पीने के शौकीन हो गए हैं। दिन ढलते ही दुकानों में पियक्क ड़ों का जमावड़ा लग जाता है। सबसे से ज्यादा स्प्रिट सरायअकिल की दुकान से बेंची जाती है। अफसरों की अनदेखी के चलते तराई के लोग नशे की जगह मौत को गले लगा रहे हैं।
------------
पांच गुना पानी मिलाकर बेचते हैं कारोबारी
कारोबारी एक लीटर स्प्रिट में पांच लीटर पानी मिलाते हैं। इसके बाद उसे नशे के शौकीनों के हाथ बेखौफ होकर बेंचते हैं। दस रुपए की स्प्रिट खरीद कर पीने वाला पूरी तरह नशे में आ जाता है। उसको यह नहीं पता होता कि वह नशा नहीं बल्कि मौत का घूंट पी रहा है।
-------------
100 रुपए लीटर बेंची जा रही स्प्रिट
कौशाम्बी जिले की स्प्रिट की दुकानों में सौ रुपए लीटर स्प्रिट गरीब मजदूरों के हाथ बेंची जा रही है। एक लीटर स्प्रिट को पांच लीटर बनाकर दुकानदार लोगों को बेंच रहे हैं। आंख की रोशनी के साथ स्प्रिट का सेवन करने वाले मौत के गाल में समा रहे हैं।
-------------
पांच से छह सौ लीटर हर महीने होता है स्प्रिट का उठान
कौशाम्बी में संचालित स्प्रिट की दुकानों में प्रतिमाह पांच से छह सौ लीटर स्प्रिट का उठाना किया जाता है जबकि यहां इसकी वास्तविक खपत इतनी नहीं है। ऐसे में साफ जाहिर होता है कि स्प्रिट का इस्तेमाल कहीं न कहीं गलत जगह पर हो रहा है। यह काला धंधा सबसे ज्यादा सिराथू और सरायअकिल की दुकानों से चलता है।
------------
कूडे़दान में फेंका गया विभाग का निर्देश
स्प्रिट बिक्री में आबकारी विभाग के मानकों पर जाए तो खरीदार का पूरा ब्यौरा कारोबारी के पास होना चाहिए। पर, जिले के कारोबारी ऐसा कुछ नहीं कर रहे हैं। यहां के संचालक विभागीय निर्देशों को कूडे़दान में फेंक मनमानी पर उतारू है। विभागीय अफसर भी दुकान आवंटन के बाद इस ओर ध्यान नहीं देते हैं। जिसकी मिशाल इन दिनों में स्प्रिट की दुकानों में देखी जा रही है।
-------------
क्या कहते है अधिकारी
जिले में स्प्रिट बेंचने के कुल पंाच लाइसेंसी हैं। इन दुकानों को मानक के साथ स्प्रिट बेंचने का निर्देश दिया गया है। सामान्य लोगों को स्प्रिट बेंचना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। यदि इसके बाद भी दुकानों से नशेड़ियों को स्प्रिट बेची जा रही है तो इसकी जांच कराकर संचालक के साथ दोषी विभागीय कर्मी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
बीपी मानिक
जिला आबकारी अधिकारी
----------------------------------