मंझनपुर। अष्टधातु की बेशकीमती मूर्ति बेचने जा रहे दो तस्करों को सैनी कोतवाली पुलिस ने मंगलवार सुबह गिरफ्तार किया है। बरामद हुई हाथी की मूर्ति की कीमत एक करोड़ रुपये से भी अधिक बताई जा रही है। पूछताछ के बाद पुलिस ने तस्करों को जेल भेज दिया है।
पुलिस को सूचना मिली कि जीटी रोड पर नरसिंहपुर कछुआ गांव स्थित निजी अस्पताल के सामने दो मूर्ति तस्कर खड़े हैं। सैनी इंस्पेक्टर राकेश तिवारी ने घेराबंदी करके रवि सोनी पुत्र केसकर निवासी बाघंबरी गद्दी अल्लापुर जिला इलाहाबाद व झूंसी निवासी अब्दुल रहमान पुत्र बन्ने को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए तस्करों के कब्जे से प्राचीन काल की हाथी की एक मूर्ति बरामद हुई है। पांच किलो 950 ग्राम की इस मूर्ति में 52 फीसदी यानी करीब तीन किलो सोना है। बाकी अन्य धातु की है। पूछताछ में तस्करों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने हफ्ते भर पहले दस लाख रुपये में रायबरेली के विशाल कुमार से मूर्ति खरीदी थी। इसे बेचने के लिए सैनी क्षेत्र में लेकर आए थे। यहां नहीं बिकती तो फतेहपुर लेकर जाते। इससे पहले ही पुलिस ने दोनों को दबोच लिया। अपने कार्यालय में पत्रकारों से वार्ता करते हुए एसपी प्रदीप गुप्ता ने बताया कि मुख्य अभियुक्त विशाल की तलाश की जा रही है। उसकी गिरफ्तारी के बाद ही साफ हो सकेगा कि मूर्ति कहां से चुराई गई है।
सैनी इंस्पेक्टर के मुताबिक पूछताछ में तस्करों ने उन्हें बताया कि उनकी सिराथू व सैनी के चार तथा फतेहपुर शहर के दो आभूषण कारोबारियों को मूर्ति दिखाने की योजना थी। सौदा तय हो जाता तो मूर्ति बेचकर लौट जाते। इसके बाद पुलिस ने इन कारोबारियों की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस को शक है कि कारोबारियों ने पहले भी मूर्तियां खरीदी होंगी। वहीं एसपी का कहना है कि सोना, चांदी, तांबा, शीशा, जस्ता, टिन, लोहा और पारा से निर्मित इस मूर्ति की ऐतिहासिकता जानने के लिए पुरातत्व विभाग को पत्र भेजा गया है। इसकी कीमत एक करोड़ से भी अधिक है।