covid vaccination in kaushambi, vaccine shorted in the distrcit
मंझनपुर। जिले में कोरोना वैक्सीन का संकट खड़ा हो गया है। वैक्सीन की डोज खत्म होने से बुधवार को टीकाकरण अभियान ठप पड़ गया। शिविरों तक पहुंचे लोगों को बगैर वैक्सीन की डोज लगवाए ही बैरंग लौटना पड़ा। हालांकि, आधी रात के बाद वैक्सीन की 3100 डोज मिलने की संभावना को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने बृहस्पतिवार को जिले भर के 37 स्थानों पर शिविर लगाकर टीकाकरण करने की योजना बनाई है। पर्याप्त वैक्सीन नहीं मिलने से अफसर भी चिंतित हैं।
कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए सरकार ने ज्यादा से ज्यादा लोगों को वैक्सीन लगवाने के लिए एक जुलाई से क्लस्टर अभियान चलाने का निर्णय ले रखा है। इसके तहत गांव-गांव शिविर लगाने की योजना बनाई गई है। पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में 21 जून से जिले के मंझनपुर, सिराथू एवं चायल ब्लॉक में क्लस्टर अभियान चलाया जा रहा है। वैक्सीन की कमी के कारण महज हफ्ते भर बाद ही महाअभियान धड़ाम हो गया। मंगलवार की सुबह ही वैक्सीन की कमी के कारण सिर्फ 595 लोगों को टीका लगाया जा सका था। दोपहर के बाद वैक्सीन खत्म होने से लोगों को बगैर टीका लगाए ही शिविर से बैरंग लौटना पड़ा। ऊपर से वैक्सीन की डोज नहीं आने के कारण बुधवार को टीकाकरण शिविर ही नहीं लगाए गए।
हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के अफसर इसके पीछे दूसरा तर्क दे रहे हैं। जिला प्रतिरक्षण अिधिकारी डॉ. हिंद प्रकाश मणि का कहना है कि कोरोना संक्रमण के कारण नियमित टीकाकरण प्रभावित चल रहा था। इसलिए बुधवार को कोविड टीकाकरण का काम रोक कर नियमित टीकाकरण कराया गया है। अबआधी रात में 3100 डोज वैक्सीन आ जाएगी। इसके बाद बृहस्पतिवार को टीकाकरण किया जाएगा। बताया कि बृहस्पतिवार को जिले के 37 स्थानों पर 2850 लोगों को टीका लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
स्टॉक में सिर्फ छह सौ डोज बची वैक्सीन की दूसरी खुराक
मंझनपुर। जिले के वैक्सीन स्टोर में फिलहाल कोवैक्सीन की 600 खुराक बची है। उसका इस्तेमाल दूसरी डोज में किया जाएगा। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी ने बताया कि आने वाली 3100 डोज में कोविशील्ड की 600 और कोवैक्सीन की 2500 खुराक शामिल है। जिसका इस्तेमाल युवाओं को लगने वाली पहली डोज के रूप में किया जागए।
जागरूकता बढ़ी तो किल्लत शुरू
मंझनपुर। टीकाकरण केंद्रों पर पहुंचे लाभार्थियों में व्यवस्था को लेकर रोष दिखा। कुछ लाभार्थियों ने कहा कि अभी प्रशासन को लक्ष्य की चिंता थी तो घर-घर जागरुकता अभियान चलाया जा रहा था। अब लोग जागरुकता दिखाकर वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे हैं तो उन्हें वैक्सीन न होने की समस्या बता वापस किया जा रहा है।