ईरान में बेटे से संपर्क न हो पाने पर उदास बैठे सहाब के परिजन- स्रोत परिजन
इजराइल और ईरान के बीच जारी हमलों के बाद करारी क्षेत्र के उन परिवारों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है, जिनके बेटे रोजी-रोटी और दीनी तालीम के लिए ईरान में रह रहे हैं। दूसरे दिन भी अधिकांश युवाओं से संपर्क नहीं हो सका है, जिससे घरों में बेचैनी का माहौल है।
क्षेत्र के 50 से अधिक युवा ईरान में शिक्षा और रोजगार के सिलसिले में गए हुए हैं। हमले की खबर मिलते ही परिजनों ने फोन और इंटरनेट के माध्यम से संपर्क साधने की कोशिश की, लेकिन नेटवर्क बाधित होने से बात नहीं हो पा रही है। माताएं और परिजन लगातार टीवी और मोबाइल पर नजर बनाए हुए हैं। स्थानीय मस्जिदों में अपनों की सलामती के लिए दुआएं की जा रही हैं।
बेटा महदी हसन करीब दस वर्ष पहले दीनी तालीम हासिल करने की नीयत से गया था। शादी के बाद से वह अपनी पत्नी के साथ वहां है। नेटवर्क न होने के कारण बच्चों से बात भी नहीं हो पा रही है। दो दिन पहले फोन पर बात हुई थी। तब बताया था कि अभी तो हालत ठीक हैं, लेकिन कब क्या हो जाए कुछ नहीं पता। -नजर हसन रिजवी, करारी निवासी
जंग के हालात को देखते हुए कहीं न कहीं बच्चों को लेकर डर बना हुआ है। बेटा शहाब सलमान रिजवी 2016 में ईरान के कुम शहर के छात्रावास में रहकर तालीम हासिल कर रहा है। शादी के बाद से उसकी पत्नी भी साथ में है और तीन छोटे-छोटे बच्चे भी हैं। -शोएब सलमान रिजवी, नयागंज निवासी
भाई मोहसिन अमेरिका और इजराइल की हिट लिस्ट वाले शहर इस्फहान में रहकर तालीम हासिल कर रहे हैं। कई दिन हो गए अभी तक भाई से कोई संपर्क नहीं हो सका। इसी तरह लहना गांव के गालिब अब्बास और मोहम्मद सकलेन भी वहां पर हैं। -मोहम्मद हसनैन, भाई