कस्बे में होली पर्व को लेकर बाजार पूरी तरह सज चुके हैं। यहां ब्रिटिशकाल से एक सप्ताह तक होली मनाने की परंपरा चली आ रही है, जिसके चलते व्यापारी पहले से ही रंग और अबीर-गुलाल का पर्याप्त भंडारण कर लेते हैं। दुकानदारों ने बताया कि इस बार कानपुर से टेलीफोन, बुलेट, ईगल, तमंचा और छन्नालाल रंग मंगाए गए हैं, जबकि बनारस से हैपी, बृजलीला, रंगीली सखी और राजा अबीर गुलाल का स्टॉक रखा गया है।
दुकानदार सत्यम केशरवानी, मनीष केशरवानी, मानिक चंद्र और संतोष केशरवानी के अनुसार कानपुर का छन्नालाल रंग और बनारस का राजा अबीर गुलाल ग्राहकों की पहली पसंद बने हुए हैं। साप्ताहिक होली को लेकर बाजार में उत्साह और कारोबार दोनों चरम पर हैं।
कस्बा में ब्रिटिशकाल से सात दिनों तक लगातार रंगोत्सव होता है। जिससे युवाओं में अबीर गुलाल को लेकर काफी उत्साह रहता है। प्रयास रहता है, कि हर्बल रंग व अबीर गुलाल ही ग्राहकों को उपलब्ध कराया जाय। - शोभित केशरवानी,किराना व्यापारी,सरायअकिल
साप्ताहिक होली में युवाओं व बच्चों की सेहत का ख्याल रखते हुए, बनारस का बना राजा अबीर गुलाल लाया गया है जो अरारोट से निर्मित है।जिससे लोगों के त्वचा को नुकसान नहीं होगा। - डिस्को केशरवानी, किराना व्यवसाई, सरायअकिल।
बाजार में भारी मात्रा में घटिया किस्म के अबीर-गुलाल मिट्टी व अन्य वस्तुओं से निर्मित लाल, हरा, पीला, भगवा, गुलाबी आदि अनेक रंग में उपलब्ध है, जो लोगों के आंखों व सेहत को नुकसान कर सकता है। -मनीष केशरवानी, रंग कारोबारी, सरायअकिल।
सरायअकिल में रंग व गुलाल से सजी दुकान और बैठा दुकानदार- संवाद
सरायअकिल में रंग व गुलाल से सजी दुकान और बैठा दुकानदार- संवाद
सरायअकिल में रंग व गुलाल से सजी दुकान और बैठा दुकानदार- संवाद