शासन के निर्देशानुसार जनता की समस्याओं के निस्तारण के लिए आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस महज आश्वासन दिवस बन गया। शनिवार को चायल तहसील में आयोजित समाधान दिवस में अधिकारी नदारद रहे। जो थोड़े-बहुत पहुंचे भी, वह पूरे समय फोन में व्यस्त नजर आए। नतीजा ये रहा कि दर्जनों फरियादी बिना शिकायतों के निस्तारण के ही लौट गए।
चायल तहसील में संपूर्ण समाधान दिवस शनिवार को नायब तहसीलदार संजय कुमार की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इस दौरान बिजली, आवास, राजस्व, राशन कार्ड और भूमि विवाद जैसी समस्याओं को लेकर फरियादी पहुंचे लेकिन अधिकारियों की उदासीनता देखकर लोगों में गहरा आक्रोश फैल गया।
उन्होंने अपनी शिकायतें दर्ज करने का प्रयास तो किया तो वरिष्ठ अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण उनकी समस्याओं को अनसुना कर दिया गया। निराश फरियादियों ने कहा कि समाधान दिवस का मूल उद्देश्य जन समस्याओं का निपटारा करना है लेकिन अधिकारी गंभीर नहीं हैं। कई फरियादियों ने आरोप लगाया कि अधिकारी शिकायतें सुनने के बजाय फोन में मशगूल रहे। वह समस्या सुनने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं।
पहाड़पुर सुधवर गांव निवासी संदीप कुमार ने बताया कि इलाके के पोस्टमैन ने डाक बांटने के लिए निजी आदमी को रखा है। वह डाक देने के एवज में 50 रुपये मांगता है। नहीं देने पर वह अगली बार डाक नहीं देने की धमकी देता है।
जलालपुर शाना गांव के मजरा समदा निवासी शिवभवन ने बताया कि उसने एक किलोवाट का घरेलू विद्युत कनेक्शन लिया है। नवंबर 2020 में बिल जमा किया था। उसके बाद गलत बिल भेज दिया गया। बिल संशोधन के लिए कई बार प्रार्थना पत्र दे चुका हूं लेकिन संशोधन करने के बजाय 1.61 लाख का बिल भेज दिया गया है। समाधान दिवस पर कुल 18 शिकायती पत्र प्राप्त हुए। जिनमें से महज एक का ही मौके पर निस्तारण किया जा सका। शेष सभी शिकायतों को संबंधित विभागों को कार्रवाई के लिए भेज दिया गया।