सियासी उलटफेर अभी भी जारी है। सपा से गठबंधन के तहत कांग्रेस ने आखिरकार चायल विधानसभा सीट ले ली। अब इस सीट से कांग्रेस अपना प्रत्याशी उतारेगी। कांग्रेस के खाते में इस सीट के जाने से सपा के घोषित उम्मीदवार चंद्रबली पटेल को तगड़ा झटका लगा है। सपा का सिंबल लेने गए चंद्रबली पटेल को लखनऊ से वापस कौशाम्बी भेज दिया गया है। जातीय समीकरणों को देखते हुए सपा व कांग्रेस ने यह नया सियासी वार चलाया है, जिससे बसपा व भाजपा की सियासी गणित प्रभावित हुई है। यह दोनों दल अब नए सिरे से रणनीति मनाने को मजबूर हो गए हैं।
सपा व कांग्रेस का गठबंधन होने के बाद माना जा रहा था कि इस सीट को कांग्रेस अपने खाते में लेगी। इसके लिए कांग्रेसियों ने जोर भी लगाया था। रविवार को भाजपा ने प्रत्याशियों की घोषण की और चायल से संजय गुप्ता को टिकट दिया। वहीं इसी दिन सीएम अखिलेश यादव की लिस्ट जारी हुई थी। इस लिस्ट में सपा से चंद्रबली पटेल ही चायल के उम्मीदवार के रूप में दर्ज थे। इससे चंद्रबली पटेल के समर्थक जश्न मना रहे थे। सपा की नई लिस्ट आने के बाद कांग्रेसी चुप्पी साधकर बैठ गए थे। मंगलवार को दोपहर बाद अचानक गठबंधन के तहत सपा ने यह सीट कांग्रेस के लिए छोड़ दी। शाम करीब पांच बजे कांग्रेस ने गठबंधन के तहत मिली सीटों की सूची भी जारी कर दी।
इस सूची में चायल सीट भी है। इसकी जानकारी होते ही कांग्रेसी उछल पड़े। उधर इस फैसले से चंद्रबली पटेल व उनके समर्थकों को तगड़ा झटका लगा। चंद्रबली पटेल सपा का सिंबल लेने के लिए लखनऊ गए थे, लेकिन उनको सिंबल नहीं दिया गया। चंद्रबली पटेल के साथ मंझनपुर विधानसभा सीट के प्रत्याशी हेमंत टुन्नू भी सिंबल लेने गए थे। हेमंत टुन्नू सिंबल लेकर वापस आ गए हैं। चायल सीट पर क्या फैसला लिया गया है, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। कांग्रेस को सपा ने चायल सीट देकर बसपा व भाजपा की रणनीति बिगाड़ दी है। जातीय समीकरण को देखते हुए सपा व कांग्रेस ने एक रणनीति के तहत यह दांव खेला है। बसपा के दलित-मुस्लिम गठजोड़ पर प्रहार तो हुआ ही है, भाजपा ने जो पिछड़ी जाति का कार्ड खेला है, उस पर भी यह सियासी वार भारी पड़ी सकता है।