अवैध खनन मामले में सीबीआई से राहत पाने की उम्मीद लगाए बैठे लोग मायूस हो गए हैं। अब इस मामले में सीबीआई शिकंजा कसेगी। पूछताछ का दौर तो तेज होगा ही, कार्रवाई का चाबुक भी चलेगा। सरकार की याचिका खारिज होने से इसकी संभावनाएं तेज हो गई है। माना जा रहा है कि 12 सितंबर के बाद दोबारा सीबीआई अपना डेरा डालेगी।
अवैध खनन को लेकर दायर हुई जनहित याचिका में न्यायालय ने 28 जुलाई को सीबीआई जांच का फैसला दे दिया था। इस आदेश के बाद प्रदेश सरकार सहित बालू खनन करने वालों में हड़कंप मच गया था। मामले में प्रदेश सरकार ने अर्जी लगाते हुए सुनवाई का अवसर देने की मांग की थी। आठ सितंबर को न्यायालय में सूबे की सरकार की अर्जी को सिरे से खारिज कर सीबीआई जांच फैसले पर अडिग रही। अर्जी खारिज होते ही दोआबा के यमुना घाटों पर अवैध खनन के जरिए करोड़ों की कमाई करने वाले कारोबारियों और सिंडीकेट पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
अवैध खनन हुआ कि नहीं इसकी रिपोर्ट भी सीबीआई ने दाखिल कर दी है। अब मामले में 12 सितम्बर की तारीख लगाई है। माना जा रहा है कि अब न्यायालय सीबीआई टीम से अवैध खनन करने वालों की तलाश कराएगी। बालू के अवैध कारोबार में शासन, प्रशासन, सिंडीकेट और स्थानीय लोगों की क्या भूमिका थी जिले में आने के बाद सीबीआई इसकी गहनता से जांच करेगी।
बर्बादी के कगार पर बालू डंप करने वाले
बालू घाट से अवैध बालू की निकासी कराकर कारोबारियों ने बालू डंप कर ली थी। मंशा थी कि बरसात के बाद वह इस बालू को महंगे दर पर बेचेेंगे। इनमें से दो-तीन ऐसे लोग हैं जिनका करोड़ों रुपया इस खेल में फंस गया है। सीबीआई जांच शुरू हुई तो इन पर शामत टूट पड़ी। रुपया तो फंसा ही, अब वह सीबीआई जांच के निशाने पर भी हैं। यदि इस सीजन उनकी बालू नहीं बिकी तो इनका बर्बाद होना तय माना जा रहा है, क्योंकि इसके लिए उन्होंने कई लोगों से कर्ज भी ले रखा था।