मेडिकल कॉलेज के नेत्र विभाग की ओपीडी में मरीज का इलाज करते डॉक्टर। संवाद
- फोटो : अवध विश्वविद्यालय के कौटिल्य प्रशासनिक सभागार में बैठक करतीं राज्यपाल
सर्दी बढ़ने के साथ ही मेडिकल कॉलेज के नेत्र विभाग की ओपीडी में मोतियाबिंद के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। रोजाना ओपीडी में पहुंचने वाले 100 से अधिक मरीजों में 25 से 30 मरीज मोतियाबिंद की समस्या से पीड़ित मिल रहे हैं।
नेत्र सर्जन डॉ. हेमंत यादव ने बताया कि ठंड के मौसम में आंखों की समस्याएं बढ़ जाती हैं। उम्र बढ़ने के साथ-साथ धूप, धूल, धुएं और ठंडी हवा के संपर्क में आने से मोतियाबिंद की समस्या तेजी से उभरती है। समय पर जांच न होने पर यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है।
उन्होंने बताया कि ओपीडी में आने वाले मरीजोंं में ज्यादातर की आंखों में धुंधलापन, कम दिखाई देना, रात में देखने में परेशानी और आंखों में जलन जैसी शिकायतें रहती हैं। ओपीडी में इलाज कराने पहुंचे मरीज राजाराम ने बताया कि काफी समय से आंखों से ठीक से दिखाई नहीं दे रहा है। जांच कराने पर डॉक्टर ने मोतियाबिंद बताते हुए उपचार की सलाह दी।
वहीं, सीता देवी ने बताया कि सर्दी शुरू होने के बाद आंखों की परेशानी बढ़ गई है, जिससे रोजमर्रा का काम करना मुश्किल हो गया है। चंदन लाल ने कहा कि समय पर जांच और इलाज से उन्हें काफी राहत मिली है।
डॉक्टरों ने मरीजों को सलाह दी है कि आंखों को ठंड और धूल से बचाएं, धूप में निकलते समय चश्मा पहनें और आंखों में किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर लापरवाही न बरतें। साथ ही मधुमेह और उच्च रक्तचाप के मरीजों को नियमित जांच कराने की जरूरत है क्योंकि इन बीमारियों से मोतियाबिंद का खतरा बढ़ जाता है।