सरकारी कर्मचारी और जनप्रतिनिधियों की जुगलबंदी से गांवों के विकास कार्य में खुलेआम लूट-खसोट हो रही है। इसका खुलासा पंचायती राज विभाग की जांच में हुआ। इस पर डीपीआरओ ने सिराथू ब्लॉक के चार गांवों के तत्कालीन ग्राम प्रधान, एडीओ सहकारिता, पंचायत सचिव समेत छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर दिया है। इन सभी पर तकरीबन 52 लाख रुपये के गबन का आरोप है। आरोप है कि धनराशि निकालने के बावजूद इन्होंने सामुदायिक शौचालय व पंचायत भवन का निर्माण नहीं कराया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर मंगलवार को हुई कार्रवाई से विकास विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
सिराथू ब्लॉक के जमालमऊ, रूपनारायणपुर सैलाबी, उलाचूपुर तथा बघेलापुर उपरहार ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन और शौचालय निर्माण के नाम पर खजाने से रकम निकाल ली गई, लेकिन पंचायत भवन और शौचालय को अधूरा छोड़ निर्माण कार्य पूर्ण होने की झूठी रिपोर्ट लगाकर शासन को भेज दी। इतना ही नहीं सभी सामुदायिक शौचालयों की देखरेख के लिए स्वयं सहायता समूहों को 54-54 हजार रुपये का भुगतान भी कर दिया गया।
पिछले दिनों मामले की शिकायत ग्रामीणों ने जिलाधिकारी सुजीत कुमार से की। डीएम के निर्देश पर डीपीआरओ डॉ. बालगोविंद श्रीवास्तव ने जांच कराई तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। जांच में पता चला कि तत्कालीन एडीओ सहकारिता एवं प्रशासक, पंचायत सचिव अर्चना सरोज, जमाल मऊ के तत्कालीन ग्राम प्रधान राजेश पाठक, रूपनारायण पुर सैलाबी की ग्राम प्रधान विमला देवी उलाचूपुर के ग्राम प्रधान मो. आमिर बघेला पुर के ग्राम प्रधान भगवत प्रसाद ने मिलीभगत कर 52 लाख रुपये की धनराशि आहरित करने बावजूद संबंधित गांवों में सामुदायिक शौचालय एवं पंचायत भवनों का निर्माण नहीं कराया।
निर्माण के नाम पर सिर्फ ढांचा भर खड़ा किया गया है। तकरीबन 52 लाख रुपये गबन का मामला सामने आने पर संबंधित ग्राम प्रधानों के साथ ही एडीओ और सचिव को नोटिस जारी की गई। जिला पंचायत राज अधिकारी डॉ. बाल गोविंद श्रीवास्तव ने बताया कि तीन महीने बाद भी आरोपियों ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। इस पर डीएम ने दिर्नेश देकर सभी के खिलाफ मंगलवार को कोखराज कोतवाली में धोखाधड़ी व फ्राड का मुकदमा दर्ज करा दिया।
अन्य ग्राम पंचायतों में भी है गबन
पंचायत सचिव द्वारा विकास कार्यों में सरकारी धन के गबन का यह मामला अकेला नहीं है। पंचायती राज विभाग के सूत्रों के मुताबिक अर्चना सरोज पर इससे पहले भी इस तरह के आरोप लग चुके हैं। लोगों का कहना है कि अर्चना के तैनाती वाले अन्य सभी गांवों की जांच कराई जाए तो तमाम चौंकाने वाले खुलासे होना तय है।