दोआबा को खुले से शौच से मुक्त बनाने के साथ-साथ गंदगी मुक्त बनाने की नई पहल शुरू हो गई है। इसके तहत ग्राम सभाओं में बायोगैस प्लांट लगाकर योजना को अंजाम तक पहुंचाया जाएगा। डीएम की इस नई पहल को अंजाम देने की कवायद पंचायती राज विभाग ने शुरू कर दी है। जिसके तहत चकताजपुर, शहजादपुर और चरवा ग्राम सभा का चयन किया गया है।
शासन द्वारा दोआबा की ग्राम सभाओं को खुले से शौच मुक्त बनाने के लिए ओडीएफ के तहत अभियान चलाया जा रहा है। इससे शौच से होने वाली गंदगी को कम करने में सफलता मिलनी भी शुरू हो गई है लेकिन घरों के कूड़े, कचरे, नालियों का गंदा पानी और गोबर से होने वाली गंदगी दूर नहीं हो रही। इसे देखते हुए डीएम अखंड प्रताप सिंह ने ओडीएफ (खुले में गंदगी से मुक्त) की नई पहल शुरू कर दी है। उनका मानना है कि गांव को पूरी तरह साफ सुथरा बनाए रखने के लिए खुले से शौच मुक्त का अभियान पर्याप्त नहीं है।
इसके साथ गांव को खुले में गंदगी से मुक्त भी करना होगा। उन्होंने गांवों में घर-घर बायोगैस प्लांट बनवाए जाने का निर्णय लिया। डीएम के इस कदम को अंजाम देने के लिए पंचायती राज विभाग ने चायल तहसील क्षेत्र के चकताजपुर, शहजादपुर और चरवा गांव का चयन करते हुए पहल शुरू करा दिया है।
गांवों को साफ सुथरा बनाने के लिए डीएम द्वारा की गई बायोगैस प्लांट स्थापना की पहल कई दृष्टि से लाभकारी दिख रही है। बायो गैस प्लांट में खर पतवार, कूड़ा, सब्जियों के छिलके और गोबर आदि डाला जाएगा। इसके बदले प्लांट मुफ्त में घरेलू गैस तो देगा ही खेतों के लिए अच्छी खाद भी मिलेगी। जिन खेतों में इस खाद को डाला जाएगा उसकी फसलें तो लहलहाएंगी ही पैदावार में भी इजाफा होगा।
दोआबा को गंदगी से मुक्त बनाए जाने के लिए डीएम अखंड प्रताप सिंह ने अभियान छेड़ दिया है। शुरुआत में जिले की ग्राम सभाओं में ढाई हजार प्लांट लगाए जाने का लक्ष्य रखा है। इन प्लांटों के स्थापित करने के लिए चकताजपुर में दस, शहजादपुर में 50 और चरवा में ढाई सौ गड्ढे खुदवाए जा रहे हैं। डीएम की माने तो बायो गैस प्लांट इतना लाभप्रद है कि इसकी मांग बढ़ना तय है। ऐसे में मांग के अनुरूप निर्धारित लक्ष्य में समय-समय पर बढ़ोत्तरी लगातार होती रहेगी।
बायो गैस प्लांट के फायदे और जरूरत को गंभीरता से समझने के लिए डीएम ने पहल की शुरुआत खुद के कैंप कार्यालय से की। उन्होंने कैंप कार्यालय में पहले प्लांट स्थापित कराया। इसके बाद उसका प्रयोग शुरू किया। डीएम की माने तो जिस दिन से प्लांट से गैस निकलना शुरू हुई उस तारीख से उनकी रसोई में एलपीजी सिलेंडर का काम खत्म हो गया। खास बात यह है कि बायोगैस प्लांट के गैस की लव एलपीजी की तुलना में कहीं अधिक ज्वलनशील है।
बायोगैस प्लांट स्थापित कराने में पंचायती राज विभाग की भूमिका सराहनीय है। लगभग 53 हजार रुपये की लागत से बनने वाली इस प्लांट के लिए पंचायती राज विभाग 40 हजार रुपये सहायता राशि के रूप में मुहैया करा रहा है। लाभार्थी को महज 13 हजार रुपये सहयोग राशि के रूप में लगाना पड़ रहा है। कुछ भी डीएम की पहल को सफलता मिली तो गांवों का गंदगी से मुक्त होना तय है।
शासन द्वारा गांवों को खुले से शौच मुक्त बनाने की पहल की गई है लेकिन यह गांवों को साफ सुथरा रखने के लिए पर्याप्त नहीं। इसके साथ गांवों को गंदगी से मुक्त रखने के लिए बायोगैस प्लांट काफी मददगार साबित होगा। इस पहल को अंजाम तक ले जाने की कवायद पंचायती राज विभाग के जरिए शुरू किया गया है।
अखंड प्रताप सिंह
जिलाधिकारी कौशाम्बी