राम किशोर शुक्ला और विवेक तिवारी।
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झाड़ फूंक में की गई देरी, मौत की बड़ी वजह
प्रभारी चिकित्सा अधिकारी सरसंवा डॉक्टर प्रसून जायसवाल का कहना है कि सर्पदंश होने पर प्रभावित अंग को स्थिर रखें और बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल पहुंचें। सर्पदंश के बाद करीब 35 मिनट का समय बहुत महत्वपूर्ण होता है।झाड़-फूंक और घरेलू उपचार कई बार स्थिति को गंभीर बना सकते हैं।
इनका कहना है -
तिरहार इलाके में मई- जून से अक्टूबर महीनों के बीच सर्पदंश की घटनाएं तेजी से बढ़ती हैं। इलाके में नाग और करैत सांप अधिक दिखते हैं। बीते साल भवनसुरी गांव के दो लोगों की मौत हो चुकी है। -रामकिशोर शुक्ला, ग्रामीण
सरसंवा ब्लॉक का अधिकांश हिस्सा यमुना नदी के किनारे बसे हुए गांवों के सीमांत तिरहार इलाके का है। सर्पदंश के मामलों में उपचार के लिए जिला अस्पताल रेफर किया जाता है, जो 40 किलोमीटर दूर है। इलाके में एक ट्रॉमा सेंटर बहुत जरूरी है। - विवेक तिवारी ग्रामीण