क्षेत्र के सरैंया से सेंवथा गांव की सड़क पर बैरियर लगने से ओवरलोड वाहनों के आवागमन पर लगाम तो लग गई लेकिन किसानों के लिए झाम जरूर है। ट्रैक्टर ट्राली और लोडर वाहनों पर खेतों से मवेशियों के लिए चारा भूसा भरकर लाने में वाहन आए दिन बैरियर पर फंस जाते हैं। जिससे किसानों को मेहनत करनी पड़ रही है।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत ग्रामीण अभियंत्रण विभाग की तरफ से वर्ष 2023 में सरैंया से सेंवथा गांव तक 9.200 किलोमीटर टू-लेन सड़क का एफडीआर तकनीक से निर्माण करवाया गया था। ओवरलोड बालू लदे वाहनों जैसे ट्रैक्टर, ट्रक, डंपर आदि के चलने से निर्माण के छह महीने में ही बदहाल होने लगी।
नवनिर्मित सड़क को खराब होने से बचाने के लिए आनन-फानन कार्यदाई संस्था की तरफ से पैचिंग करवाकर दुरुस्त करवाया गया और सड़क पर ओवरलोड चलने वाले वाहनों के आवागमन पर लगाम लगाने के लिए सरैंया पुल, तिल्हापुर, मीरापुर गंधोई के समीप लोहे के बैरियर लगवा दिया गया।
सड़क पर बैरियर लगने से ओवरलोड वाहनों पर अंकुश तो लग गया, लेकिन किसानों के लिए मुसीबत बढ़ गई। सड़क किनारे बसे गांवों सुरसेनी, कुम्हारन का पुरवा, गंधोई, दुर्गापुर, फरीदपुर आदि के किसानों को ट्रैक्टर, लोडर वाहन आदि पर चारा, भूसा, पुआल आदि लादकर लाने में परेशान होना पड़ रहा है।
चारा भूसा लादकर आने वाले वाहन अक्सर बैरियर पर आकर फंस जाते हैं। सुरसेनी गांव के किसान मनोज द्विवेदी, राजकुमार शुक्ल जैतपुर पूरेहजारी के राजकुमार बाजपेई,नन्हू आदि किसानों का कहना है कि भले ही उन्हें थोड़ी बहुत परेशानी होती है लेकिन बैरियर लगने से कम से कम सड़क तो सुरक्षित है।