इस बीच प्रयागराज में अतीक गैंग के शूटरों ने राजूपाल हत्याकांड के मुख्य गवाह उमेश पाल व उनके दो सरकारी सुरक्षा कर्मियों की हत्या कर दी। इस घटना ने प्रदेश सरकार को हिलाकर रख दिया। पुलिस को पता चला कि उमेश पाल हत्याकांड के बाद शूटर भखंदा में अब्दुल कवि के यहां शरण लिए हुए हैं। पुलिस ने टीम बनाकर उसके घर पर दबिश दी लेकिन कोई शूटर नहीं मिला।
घर की दीवारों में कुछ जगह ताजा प्लास्टर दिखने पर पुलिस ने जेसीबी व पोकलैंड मशीन से घर जमींदोज कराया तो उसके यहां दीवारों में छिपाकर रखे गए नाजायज असलहें, बम, चापड़ व चाकू बरामद हुआ। पुलिस ने अब्दुल कवि के पिता अब्दुल गनी के नाम पर पर जारी इकनाली बंदूक को भी जब्त किया। इस शस्त्र के निरस्तीकरण के लिए पांच मार्च को पुलिस ने रिपोर्ट तैयार कर संस्तुति के लिए जिला मजिस्ट्रेट को भेजी है। माना जा रहा है जल्द ही यह लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा।
ओमप्रकाश पाल पर कातिलाना हमले में बंदूक के प्रयोग का शक
राजूपाल हत्याकांड में चकपिन्हा गांव के ओम प्रकाश पाल भी गवाह हैं। उनकी गवाही सीबीआई कोर्ट में होना बाकी है। सितंबर 2020 में ओम प्रकाश पर माफिया अतीक के शूटर अब्दुल कवि ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर तमंचे से फायर किया था। घटना में वह बाल-बाल बचे। एक अक्तूबर 2020 को ओम प्रकाश पाल ने अब्दुल कवि समेत तीन लोगों के खिलाफ कातिलाना हमले की रिपोर्ट दर्ज कराया।
आरोप लगाया कि अब्दुल कवि उस पर राजूपाल हत्याकांड में गवाही नहीं देने का दबाव डाल रहा था। मना करने पर उसने गोली चलाई। पुलिस को शक है कि हमले में अब्दुल कवि ने अपने पिता की लाइसेंसी बंदूक का इस्तेमाल किया होगा। शस्त्र निरस्तीकरण की भेजी गई रिपोर्ट में इसका भी जिक्र किया गया है। हालांकि इस घटना में कोई गवाह नहीं मिलने के कारण पुलिस ने मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। अब फिर से विवेचना की जा रही है।
आईजी ने घोषित किया शूटर कवि पर इनाम
पुलिस को शक है कि राजूपाल हत्याकांड के गवाह उमेश पाल की हत्या में भी अब्दुल कवि का हाथ हो सकता है। इस पर आईजी चंद्रप्रकाश ने उसकी गिरफ्तारी के लिए 50 हजार का इनाम घोषित किया है। सीबीआई ने अब्दुल कवि को पहले ही भगोड़ा घोषित कर रखा है।