चरवा कोतवाली के काजू गांव के मजरा रमदयालपुर गांव में पत्नी के पहले पति से बातचीत से नाराज होकर युवक ने पिता की लाइसेंसी दोनाली बंदूक से गोली मार आत्महत्या कर ली। युवक मंगलवार सुबह ही दिल्ली से लौटा था। सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। रमदयालपुर गांव की अंजू सिंह ने बताया कि उसका देवर जयबाबू सिंह (28) पुत्र धर्मपाल दिल्ली में प्राइवेट काम करता था। छह साल से उसका काजू गांव की ही करिश्मा से प्रेम-प्रसंग चल रहा था। पांच साल पहले परिजनों ने युवती की शादी फतेहपुर जनपद के खागा कोतवाली के एक गांव निवासी युवक के साथ कर दिया था।
अंजू सिंह के अनुसार, शादी के बाद भी जयबाबू युवती से मोबाइल पर बातचीत करता था। दो माह पहले युवती ससुराल से भागकर जयबाबू के पास दिल्ली चली गई। गांव लौटने पर घरवालों ने युवती का जयबाबू के साथ कोर्ट मैरिज करवा दिया था। कोर्ट मैरिज के बाद जयबाबू करिश्मा को लेकर दिल्ली चला गया था लेकिन युवती फोन पर पहले पति से भी बातचीत करती थी। इसी बात को लेकर दोनों में विवाद शुरू हो गया। इससे नाराज होकर करिश्मा जयबाबू को छोड़कर पहले पति के पास फतेहपुर चली गई थी। दो दिन पहले दोबारा वह जयबाबू के पास दिल्ली चली गई थी लेकिन पहले पति से मोबाइल पर बात करना बंद नहीं किया। इस पर दोनों में फिर विवाद हो गया।
इससे नाराज होकर जयबाबू मंगलवार सुबह दिल्ली से गांव लौटा। यहां घर की तीसरी मंजिल पर वह सोने चला गया। करीब सुबह नौ बजे नाश्ता करने के लिए भाभी अंजू जयबाबू को जगाकर नीचे उतर आई। थोड़ी देर बाद कमरे में रखी पिता की लाइसेंसी दोनाली बंदूक से युवक ने खुद को गोली मार ली।
गोली की आवाज सुनकर परिजन भाग कर ऊपर के कमरे में पहुंचे। जहां खून से लथपथ जयबाबू तड़प रहा था। जयबाबू की मौत से परिजनों में चीख-पुकार मच गई। चरवा इंस्पेक्टर महेश सिंह ने बताया कि 1987 में जयबाबू के पिता राजेंद्र सिंह को दोनाली बंदूक के लिए लाइसेंस मिला था। वे क्षेत्र के संभ्रांत किसानों में हैं। इधर, सीओ चायल अभिषेक सिंह ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। अब तक परिजनों ने किसी पर आरोप नहीं लगाया है। मामले की जांच की जा रही है।
करवाचौथ पर रखा था जयबाबू के लिए व्रत
भाभी अंजू सिंह ने बताया कि करिश्मा ने करवाचौथ पर जयबाबू के लिए व्रत रखा था। अंजू सिंह ने बताया कि पिता की बंदूक हटा देती तो देवर की शायद जान बच जाती। छोटा होने के कारण जयबाबू घर का दुलारा था। गांव निवासी राजेंद्र सिंह के पांच बेटे हैं। बड़ा बेटा तीरथ सिंह, बृजेंद्र सिंह, देवेंद्र सिंह, बृजेश सिंह और जयबाबू सभी दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करते हैं। जयबाबू घर का सबसे छोटा होने के चलते सबका दुलारा था।