खेत में खुदाई के दौरान मिलीं मूर्तियां।
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सूचना मिलते ही परमेश्वर त्रिपाठी व उनके परिवार के नीरज त्रिपाठी, सुरेन्द्र त्रिपाठी सहित गांव के लोग खेत पहुंच गए और मूर्ति को लाकर गांव के काली माता मंदिर में रख कर पूजा अर्चना शुरू कर दिया है। सुबह होते ही मूर्ति मिलने की बात गांव वालों को भी पता चली तो दर्शन के लिए लोगों की भीड़ लग गई। मूर्ति ढाई फिट ऊंची बताई जा रही है। यह मूर्ति किसकी है और कितनी पुरानी है यह कोई नहीं बता पा रहा है।
जिस स्थान से मिली प्राचीन मूर्ति पूर्व में थी बंजारों की बस्ती
गांव के केशव देव और शिवकरन यादव बताते हैं कि जिस स्थान से मूर्ति मिली है, वहां पर पूर्व में बंजारों की बस्ती थी। यह जानकारी उनको पूर्वजों द्वारा दी गई थी। मूर्ति में उकेरी गई कला आकृति में पैर के नीचे लम्बी सींग वाले भैंसे का सर दबा है और दाहिने हाथ में भाले से भैंसें के गर्दन में चुभाया गया दिख रहा है।