कोतवाली क्षेत्र के कादीपुर गांव के समीप मंगलवार की रात अज्ञात वाहन की टक्कर से एक प्रोफेसर की मौत हो गई। सुबह प्रोफेसर की लाश सड़क किनारे खून से लथपथ पड़ी मिली। बाइक भी उनके ऊपर पड़ी थी। सड़क किनारे शव देख मौके पर लोगों का मजमा जमा हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने परिजनों को घटना की जानकारी देते हुए शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रोफेसर की मौत से घर-परिवार में कोहराम मचा है।
वाराणसी जिले के अर्दली बाजार निवासी शैलेन्द्र नारायण मिश्र (40) पुत्र वाचस्पति मिश्र भरवारी मेहता कालेज में प्रोफेसर थे। तैनाती के बाद से वह परिवार के साथ कैंपस में ही रहते थे। बताया जा रहा है कि मंगलवार की शाम वह कमरे से मंझनपुर जाने के लिए बाइक से निकले थे। इसके बाद वह घर नहीं लौटे। बुधवार की सुबह प्रोफेसर की लाश कादीपुर गांव के समीप ससुर खदेरी नदी स्थित पुल के बगल खून से लथपथ पड़ी मिली।
सड़क किनारे शव देख राहगीरों ने आस-पास के लोगों के साथ मंझनपुर पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने मौजूद लोगों से शव की पहचान कराने के बाद घटना की जानकारी परिजनों को दी। प्रोफेसर की मौत की खबर मिलते ही परिजनों के साथ शिक्षकों और बच्चों के होश उड़ गए। माना जा रहा है कि रात में वह मंझनपुर से घर लौट रहे थे उसी समय यह हादसा हुआ होगा। पुल के समीप सड़क पर बने खड्ड में गिरने से या फिर किसी अज्ञात वाहन की टक्कर से मौत हुई है। पुलिस ने जांच पड़ताल के बाद शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। प्रोफेसर की मौत से परिवार में कोहराम मचा है।
दुर्घटना के बाद बाइक के नीचे दबे प्रोफेसर की मौत तड़प-तड़प कर हुई है। सड़क किनारे बाइक समेत पड़े होने के दौरान भी किसी की नजर प्रोफेसर पर नहीं पड़ी। गश्त कर रही पुलिस ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया या फिर गश्त पर पुलिस थी ही नहीं। चर्चा है कि रात इसी रास्ते से मंझनपुर पुलिस गश्त के लिए आई-गई होगी। पुलिस की नजर सड़क किनारे पड़ी लाश पर क्यों नहीं पड़ी। इसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। किसी की नजर पड़ती तो शायद प्रोफेसर की जान बच जाती।