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Kaushambi News: किसी के हाथ में कलम तो किसी के हाथ में कड़छी... शाम को बदल जाते हैं किरदार

Fri, 09 Oct 2026 12:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
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परशुराम की भूमिका में पोस्ट मास्टर राजमणि तिवारी
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:: दिन में नौकरी-कारोबार और पढ़ाई, शाम होते ही रामलीला के मंच पर निभाते हैं अलग-अलग पात्र
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फोटो - 11 से 16
मनोज कुमार सहगल
कड़ा। नगर पंचायत के दारानगर की श्रीरामलीला दशहरा महोत्सव में मंच पर उतरने वाले कलाकार कोई पेशेवर कलाकार नहीं, बल्कि गांव के ही लोग हैं। दिन में कोई नौकरी करता है तो कोई दुकान चलाता है। कोई स्कूल में पढ़ता है। शाम होते ही सभी अपने काम से अलग होकर रामलीला के पात्रों में ढल जाते हैं। बुजुर्गों से लेकर बच्चों तक की इसमें भागीदारी रहती है।
रामलीला में परशुराम की भूमिका राजमणि तिवारी निभाते हैं, जो प्रयागराज में पोस्टमास्टर के पद पर तैनात हैं। उन्होंने बताया कि ड्यूटी के बाद रोज पाठ का अध्ययन करते हैं, ताकि मंचन के दौरान किसी तरह की कठिनाई न हो। दारानगर में छोले की दुकान चलाने वाले विष्णु साहू रावण की भूमिका निभाते हैं। इलेक्ट्रीशियन श्रीनारायण मिश्रा उर्फ बब्बू हनुमान और सेल्स मैनेजर दीपक मणि तिवारी सुग्रीव का किरदार निभाएंगे। बैटरी की दुकान चलाने वाले राहुल मिश्र अंगद और ओमप्रकाश तिवारी जामवंत की भूमिका निभाएंगे। संवाद
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इनसेट-
स्कूल से लौटकर करते हैं पाठ और रिहर्सल
रामलीला में बच्चों की भूमिका भी आकर्षण का केंद्र है। कक्षा पांच के कार्तिकेय मिश्रा जो कि राम की भूमिका में हैं, कक्षा छह के अंशु मिश्रा सीता, कक्षा पांच के वंश मिश्रा लक्ष्मण, कक्षा छह के सूर्यश तिवारी भरत और कक्षा छह के कौस्तुभ मणि तिवारी शत्रुघ्न की भूमिका निभाएंगे। स्कूल से लौटने के बाद बच्चे घर पर पाठ याद करने के साथ रिहर्सल करते हैं। कमेटी के महामंत्री योगेंद्र मिश्रा ने बताया कि पात्रों का चयन कमेटी की ओर से किया जाता है।
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इनसेट-
सवारी के साथ चलते हैं पुरोहित
रामलीला में पुरोहितों की भी अहम भूमिका है। पंडित चंद्रिका प्रसाद मिश्र के नेतृत्व में कई पुरोहितों की टीम भगवान की सवारी के साथ रामायण का पाठ करती है। शृंगार भवन से सवारी निकलने से लेकर वापसी तक जहां-जहां सवारी रुकती है और पूजा होती है, वहां रामायण पाठ चलता रहता है। दीनानाथ अवस्थी, नीलकमल मिश्रा, संजय पाठक, रेवती रमन पांडे और शिवम मिश्रा समेत पुरोहित प्रतिदिन योगदान देते हैं। यही सामूहिक भागीदारी दारानगर की रामलीला को आस्था और परंपरा से जोड़ती है।

परशुराम की भूमिका में पोस्ट मास्टर राजमणि तिवारी

परशुराम की भूमिका में पोस्ट मास्टर राजमणि तिवारी

परशुराम की भूमिका में पोस्ट मास्टर राजमणि तिवारी

परशुराम की भूमिका में पोस्ट मास्टर राजमणि तिवारी

परशुराम की भूमिका में पोस्ट मास्टर राजमणि तिवारी

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