सैनी थाना क्षेत्र में नाबालिग लड़की की बरामदगी के लिए फर्जी एसओ बनकर 50 हजार रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। एफआईआर के अनुसार एक व्यक्ति ने मोबाइल फोन पर स्वयं को एसओ राजीव यादव बताकर पीड़ित पक्ष को भरोसे में लिया और डिजिटल भुगतान के जरिये पैसे ले लिए। इस प्रकरण में एक पूर्व प्रधान की भूमिका भी संदिग्ध है। पुलिस ने अज्ञात फर्जी पुलिसकर्मी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जबकि पूर्व प्रधान पर अभी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
एफआईआर के मुताबिक पीड़ित की ससुराल से जुड़ी एक नाबालिग लड़की को गांव का ही युवक लेकर चला गया। परिजन उसकी तलाश में इधर-उधर भटक रहे थे। आरोप है कि इसी दौरान एक पूर्व प्रधान ने पीड़ित को एक मोबाइल फोन नंबर दिया और दावा किया कि यह किसी दरोगा का है। कहा गया कि इस नंबर पर बात कर बताए गए बैंक खाते में रुपये भेज दो तो लड़की की बरामदगी हो जाएगी।
आरोप यह भी है कि अगले दिन सुबह करीब पांच बजे पूर्व प्रधान स्वयं पीड़ित के घर पहुंचा और कहा कि एसओ राजीव यादव का फोन आया है। उनसे बात कर लो। फोन पर खुद को थाना प्रभारी बताते हुए एक व्यक्ति ने किशोरी को बरामद करने के एवज में 50 हजार रुपये की मांग की। भरोसे में आकर पीड़ित ने 26 अक्तूबर को क्यूआर कोड के माध्यम से 50 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में पीड़ित को पता चला कि फोन करने वाला व्यक्ति फर्जी था और वह ठगी का शिकार हो चुका है।
मामले में पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार ने बताया कि फर्जी एसओ बनकर ठगी करने वाले राजीव यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है। साथ ही पूर्व प्रधान की भूमिका की भी जांच कराई जा रही है। इसमें जो तथ्य सामने आएंगे उनके आधार पर विधिक कार्रवाई की जाएगी।