जिला अस्पताल में पहली बार लैक्टेटिंग मिल्क यूनिट (एलएमयू) की स्थापना हो रही है। इसके बाद से नवजात शिशुओं, विशेषकर समय से पहले जन्मे (प्रीमैच्योर) और बीमार बच्चों को सुरक्षित रूप से मां का दूध उपलब्ध हो सकेगा।
एलएमयू के लिए अस्पताल में विशेष वार्ड बनकर तैयार हो चुका है और कुछ आवश्यक उपकरण पहुंच चुके हैं। जबकि शेष उपकरण जल्द आने की संभावना है। अब तक जिला अस्पताल में यह सुविधा उपलब्ध न होने के कारण गंभीर नवजात शिशुओं को प्रयागराज और अन्य बड़े जिलों के अस्पतालों में रेफर करना पड़ता था।
मातृ दूध से संक्रमण से मिलेगा बचाव
बाल रोग विशेषज्ञ रंजीत कुमार निर्मल बताते हैं कि, मां का दूध नवजात शिशु के लिए सर्वोत्तम आहार है। इसमें आवश्यक पोषक तत्वों के साथ एंटीबॉडी भी होती हैं, जो बच्चों को डायरिया, निमोनिया और अन्य संक्रमणों से बचाने में मदद करती हैं। खासतौर पर असमय जन्मे बच्चों के लिए यह अधिक लाभकारी होता है। साथ ही माताओं को सही स्तनपान तकनीक की जानकारी भी दी जाएगी।
इच्छुक महिलाएं दान कर सकेंगी अपना दूध
अस्पताल में बच्चों को जन्म देने वाली कई माताओं के स्तन से कई बार पर्याप्त दूध नहीं निकल पाता, जिससे नवजात शिशु को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में बाहर का दूध पिलाने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। एलएमयू यूनिट के शुरू होने पर इच्छुक महिलाएं अपना दूध डोनेट भी कर सकेंगी। इस डोनेटेड दूध को सुरक्षित तरीके से संग्रहित कर जरूरतमंद नवजातों को दिया जाएगा।
जिला अस्पताल में लैक्टेटिंग मिल्क यूनिट के लिए वार्ड तैयार हो चुका है। कुछ जरूरी उपकरण प्राप्त हो गए हैं और शेष उपकरण भी जल्द उपलब्ध हो जाएंगे। यह व्यवस्था जिले में पहली बार शुरू हो रही है, जिससे नवजात शिशुओं, विशेषकर प्रीमैच्योर बच्चों के उपचार में काफी मदद मिलेगी। -डॉ. हरिओम कुमार सिंह, प्रिंसिपल, मेडिकल कॉलेज