रैगिंग : सिर झुकाने, जीरो कटिंग और दो चोटी बनाने के लिए किया मजबूर
मंझनपुर। शैक्षणिक संस्थानों में रैगिंग प्रतिबंधित किए जाने के बावजूद स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र-छात्राओं को सिर झुकाने, जीरो कटिंग और दो चोटी बनाने के लिए मजबूर किया गया। एंटी रैगिंग सेल नई दिल्ली में शिकायत न होती तो शायद मामला दबा रहता। हालांकि, महाविद्यालय प्रशासन ने अनुशासनहीनता के खिलाफ सख्त संदेश दिया है।
निलंबित किए गए बैच की कक्षाएं एक माह के लिए स्थगित कर दी गईं और छह दिसंबर से एक माह के लिए छात्रावास खाली करने का आदेश दिया गया। इसके साथ ही छात्रों और अभिभावकों से अनिवार्य शपथ पत्र जमा करने का निर्देश जारी किया गया है। ऐसा न करने पर कक्षाओं में उपस्थिति और भविष्य में महाविद्यालय में बने रहने पर रोक लगाई जा सकती है।
जूनियर्स का मनोबल बढ़ा, कॉलेज में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी
सख्त कार्रवाई से प्रथम वर्ष के छात्रों का भरोसा बढ़ा है। वहीं प्रशासन ने फैकल्टी मॉनिटरिंग, वार्डन राउंड और हेल्पलाइन सक्रियता बढ़ा दी है। वहीं कुछ सीनियर्स ने दंड को कठोर बताया लेकिन प्रबंधन का रुख साफ है कि रैगिंग पर जीरो टॉलरेंस रहेगा। और आगे निगरानी व प्रतिबंध और मजबूत किए जाएंगे।
रैगिंग : सिर झुकाने, जीरो कटिंग और दो चोटी बनाने के लिए किया मजबूर
शैक्षणिक संस्थानों में रैगिंग प्रतिबंधित किए जाने के बावजूद स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र-छात्राओं को सिर झुकाने, जीरो कटिंग और दो चोटी बनाने के लिए मजबूर किया गया। एंटी रैगिंग सेल नई दिल्ली में शिकायत न होती तो शायद मामला दबा रहता। हालांकि, महाविद्यालय प्रशासन ने अनुशासनहीनता के खिलाफ सख्त संदेश दिया है।
निलंबित किए गए बैच की कक्षाएं एक माह के लिए स्थगित कर दी गईं और छह दिसंबर से एक माह के लिए छात्रावास खाली करने का आदेश दिया गया। इसके साथ ही छात्रों और अभिभावकों से अनिवार्य शपथ पत्र जमा करने का निर्देश जारी किया गया है। ऐसा न करने पर कक्षाओं में उपस्थिति और भविष्य में महाविद्यालय में बने रहने पर रोक लगाई जा सकती है।
जूनियर्स का मनोबल बढ़ा, कॉलेज में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी
सख्त कार्रवाई से प्रथम वर्ष के छात्रों का भरोसा बढ़ा है। वहीं प्रशासन ने फैकल्टी मॉनिटरिंग, वार्डन राउंड और हेल्पलाइन सक्रियता बढ़ा दी है। वहीं कुछ सीनियर्स ने दंड को कठोर बताया लेकिन प्रबंधन का रुख साफ है कि रैगिंग पर जीरो टॉलरेंस रहेगा। और आगे निगरानी व प्रतिबंध और मजबूत किए जाएंगे।
एमएलएन मेडिकल कॉलेज में भी हुई थी कार्रवाई
मोती लाल नेहरू (एमएलएन) मेडिकल कॉलेज में करीब डेढ़ साल पहले एमबीबीएस प्रथम वर्ष के तीन छात्रों के साथ रैगिंग का मामला सामने आया था। मेडिकल कॉलेज के एंटी रैगिंग सेल ने तृतीय वर्ष के दो छात्रों दो दोषी पाया था। इसके बाद मेडिकल कॉलेज की तत्कालीन प्राचार्य डॉ. वत्सला मिश्रा ने दोनों छात्रों को निलनिलंबित कर दिया था।