गोशाला में मवेशियों के पेट भरने का संकट
आठ रुपये किलो बाजार में बिक रहा भूसा, पांच रुपयो कूरा पुआल, 30 रुपये में कैसे भरेगा मवेशियों का पेट
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर/म्योहर/करारी। भूसे के आसमान छू रहे दाम ने गोशाला में रखे गए मवेशियों के पेट भरने का संकट खड़ा कर दिया है। बतौर चारा मवेशियों को पुआल खिलाकर पेट नहीं भरा जा सकता।
पशु पालन विभाग जिले में संचालित 23 अस्थाई गोशालाओं में 17 सौ मवेशियों को रखने का दावा कर रहा है। बताया जा रहा है कि एक मवेशी पर सरकार की तरफ से 30 रुपया रोजाना भोजन-पानी के लिए दिया जाता है। बताया जाता है कि यह पैसा पर्याप्त नहीं है। क्योंकि भूसा और पुआल के दाम आसमान छू रहे हैं। जिले में इन दिनों भूसा आठ सौ से एक हजार रुपया प्रति कुंतल है। एक सामान्य गाय को रोजाना कम से कम आठ किलो भूसा चाहिए। इसी तरह पुआल भी पांच रुपये कूरा मिल रहा है। ऐसे में सरकार की तरफ से मिलने वाले पैसे से पुआल की भी व्यवस्था नहीं हो पा रही है।
कौशाम्बी विकास खंड के म्योहर गांव में गोशाला का निर्माण किया गया था। ग्राम प्रधान दिनेश कुमार का कहना है कि मेला मैदान के समीप अपने व सेक्रेटरी के निजी स्त्रोत से बीडीओ के मौखिक कहने पर बांस की बाड़ तैयार कर गोशाला बनाई गई थी। गांव के लोग बाड़ उठा ले गए। इस वजह से गोशाला का वजूद मिट गया और मौके पर एक भी मवेशी नहीं हैं। वहीं गांव के किसानों का कहना है कि इन दिनों इलाके में करीब डेढ़ सौ अन्ना मवेशियों का झुंड है। बड़े काश्तकार अपने खेत के चारों तरफ कटीली तार लगवाए हैं। छोटे किसान रतजगा करने के लिए मजबूर हैं। भूखे मवेशी हांकने पर हिंसक हो जाते हैं। ऐसेे में किसान समूह बनाकर उन्हें हांकते हैं। करारी कस्बे में कान्हा गोशाला का निर्माण आजाद नगर में किया गया है। यहां करीब 72 गोवंश हैं। जिनमें सिर्फ छह गाय हैं बाकी बछड़े हैं। इन मवेशियों को बगल में बनाए गए सुलभ कॉप्लेक्स से पानी तो मिल जाता है, लेकिन चारे का संकट हैं। अमर उजाला टीम की पड़ताल के दौरान गोशाला में सिर्फ सात कुंतल भूसा मिल सका है।