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श्रवण बने बेटों के सहारे बुजुर्गो ने मतदान कर लोकतंत्र पर दिखाई आस्था

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श्रवण बने बेटों के सहारे बुजुर्गों ने मतदान कर लोकतंत्र पर दिखाई आस्था
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-व्हील चेयर और साइकिल के सहारे बच्चों ने ले जाकर डलवाया वोट
फोटो नं-
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। चलाचली की बेला में भी जिले के बुजुर्ग मतदाताओं ने लोकतंत्र के महापर्व पर अपनी आस्था का इजहार किया। कोई चल फिर नहीं सकता था तो कोई बिना किसी सहारे के हिल भी नहीं सकता था। इसके बावजूद बुजुर्गों ने मतदान करने का हौसला दिखाया तो उनके अपने श्रवण कुमार बनकर सामने आ गए। जिले भर के तमाम पोलिंग बूथों पर ऐसे बुजुर्ग देखने को मिले।
अजुहा के कृष्णा नगर में रहने वाली 115 वर्षीय सुबिहती पत्नी रामजीवन सिंह व्हील चेयर के सहारे मतदान के लिए पोलिंग बूथ तक पहुंची थी। मतदान के बाद अंगुली में लगी अमिट स्याही को दिखाते हुए सुबिहती का कहना था कि देश की तरक्की के लिए वह वोट करने आई हैं। केंद्र पर उनका माला पहनाकर स्वागत किया गया। भरवारी नगर पंचायत में बने पोलिंग बूथ पर 95 साल की एक महिला अपने नाती के सहारे वोट डालने पहुंची थी। कमर से पूरी तरह झुक चुकी महिला को उसका नाती सहारा देकर लाया था। सरायअकिल के एक मतदान केंद्र पर भी ऐसी ही दो बुजुर्ग महिला पहुंची थी। नगर पंचायत की तरफ से बुजुर्ग और दिव्यांगजन को बूथ तक पहुंचाने के लिए व्हील चेयर व कर्मचारी लगाया गया था। व्हील चेयर के सहारे दोनों ने अपने पसंदीदा प्रत्याशी के पक्ष में वोट डाला। सिराथू के पोलिंग बूथ पर 90 वर्षीय बृजरानी डंडे के सहारे वोट देने पहुंची थी। उसके साथ रहा युवक महिला को सहारा दिए था। लोहंदा पोलिंग बूथ पर एक दिव्यांग बुजुर्ग मतदाता ट्राई साइकिल से वोट डालने पहुंचा था। मोहम्मतपुर पइंसा की बुजुर्ग यासीन बानो मतदान के लिए पहुंची थी। वोट देकर बाहर निकली तो गश खाकर गिर गई। बाद में उन्हें ट्राईसाइकिल से घर भिजवाया गया। सरायअकिल में 98 साल की जुगुन्ति देवी भी परिजनों के साथ वोट डालने गई थी।
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प्रत्याशी ही नहीं, सियासी दिग्गजों की प्रतिष्ठा भी स्ट्रांगरूम के हवाले
- डिप्टी सीएम केशव और भाजपा के तीनों विधायकों ने पार्टी प्रत्याशी को जिताने में झोंकी थी ताकत
- जनसत्ता दल प्रत्याशी शैलेंद्र कुमार के लिए राजाभैया घूमे गली-गली
- गठबंधन ने पूर्व कैबिनेट मंत्री इंद्रजीत पर खेला है दांव, सपा मुखिया ने की थी जनसभा
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। कौशाम्बी संसदीय सीट का चुनाव कई मायनों में काफी अहम रहा। भाजपा, जनसत्ता और गठबंधन के सिम्बल में भले ही प्रत्याशी लड़ रहे थे, लेकिन उन्हें जिताने की कसौटी तमाम दिग्गजों पर थी। सोमवार को प्रत्याशियों की किस्मत के साथ ही दिग्गजों की प्रतिष्ठा भी स्ट्रांगरू में कैद हुई है। आने वाले 23 मई को चुनाव परिणाम साबित करेगा कि आखिर किसका जादू चला।
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भाजपा के लिए यह लोकसभा चुनाव कई मायनों में अहम है। पहला पार्टी ने यहां से सांसद रहे विनोद सोनकर पर दोबारा विश्वास जताया है। वहीं प्रदेश सरकार के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद का कौशाम्बी गृह जनपद है। विनोद के सर्मथन में केशव ने तीन जनसभाएं की थी। एक मई को भरवारी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी रैली की। रैली में केशव भी शामिल थे। इतना ही नहीं जिले की तीनों विधान सभा में भाजपा के ही विधायक है। सपा-बसपा गठबंधन ने इंद्रजीत सरोज पर दांव लगाया। इंद्रजीत सरोज सदर विधानसभा से चार बार विधायक और दो मर्तबा कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। इंद्रजीत के लिए सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 30 अप्रैल को कादीपुर में जनसभा किया था। पहली बार प्रदेश में नई पार्टी (जनसत्ता) बनाकर राजनीति में उतरे कुंडा के विधायक रघुराज प्रताप सिंह राजाभैया ने यहां से पूर्व सांसद शैलेंद्र कुमार को मैदान में उतारा था। शैलेंद्र कौशाम्बी से तीन बार सांसद और एक बार प्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके हैं। शैलेंद्र को जिताने के लिए राजाभैया ने कौशाम्बी में पूरी ताकत लगा रखी थी। खासकर ठाकुर बिरादरी के वोट को अपने पाले में करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। तमाम दल छोड़कर लोग जनसत्ता के साथ जुड़े। सोमवार को मतदान समाप्त होने के बाद अब जीत हार का मंथन हो रहा है। कौशाम्बी संसदीय सीट से दल से ज्यादा दिग्गजों की प्रतिष्ठा जीतना अहम मुद्दा बना हुआ है।
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