वाहनों की किल्लत ने रुलाए खून के आंसू
- दिनभर इधर-उधर भटकते रहे मुसाफिर, ई-रिक्शा और विक्रम बने सहारा
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। मतदान के दिन सवारी वाहनों की किल्लत ने मुसाफिरों को खून के आंसू रोने पर मजबूर कर दिया। यात्री दिनभर इधर, उधर भटकते रहे। अंत में जेब ढीली करनी पड़ी और विक्रम तथा ई-रिक्शा उनका सहारा बने।
लोकसभा चुनाव के लिए प्रशासन ने जिले भर की बस, मैजिक, बोलेरो आदि वाहनों को कब्जे में ले लिया था। आम लोगों के निजी वाहन भी कस्टडी में ले लिए गए थे। इसकी बदौलत जनपद भर की सड़कों पर सवारी वाहनों का टोटा देखने को मिला। स्थानीय लोग तो अपने साधन से ही आए और गए। पर, बाहर से आए यात्रियों को घोर परेशानी का सामना करना पड़ा। घंटों इंतजार के बाद भी साधन नहीं मिला तो लोगों को ई-रिक्शा या विक्रम रिजर्व करना पड़ा। चालकों ने मुंहमांगी रकम ली। इसके बाद परेशानहाल मुसाफिरों को गंतव्य तक पहुंचाया।
बाबागंज और कुंडा पर टिकी रहीं निगाहें
- पल-पल की गतिविधियों का जायजा लेने को उत्सुक दिखे लोग
मंझनपुर (ब्यूरो)। मतदान के दौरान दोआबावासियों की निगाहें प्रतापगढ़ की कुंडा व बाबागंज विधानसभा सीटों पर टिकी रहीं। लोग पल-पल की गतिविधियों के बारे में जानने को उत्सुक रहे। इसके लिए किसी ने रिश्तेदारों को फोन मिलाया तो किसी ने सोशल मीडिया का सहारा लिया।
कौशाम्बी लोकसभा क्षेत्र में प्रतापगढ़ की बाबागंज व कुंडा विधानसभा सीटें भी शामिल हैं। दोनों सीट जनसत्ता दल संस्थापक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की प्रभाव वाली मानी जाती हैं। दोआबा की सियासत में अभी हाल ही में राजा की इंट्री हुई है। ऐसे में जिले के लोग वहां की दोनों सीटों पर वोटिंग की स्थिति की जानकारी करने को बेताब रहे। मतदान प्रक्रिया शुरू होते ही लोगों ने कुंडा, बाबागंज में रहने वाले रिश्तेदारों को फोन मिलाना शुरू कर दिया। फोन पर लोग क्षण-क्षण की अपडेट लेते रहे। जनपद के मीडिया कर्मचारियों के फोन भी घनघनाए। कुछ व्हाट्एस ग्रुपों में पांचों विधानसभा सीटों की अपडेट भेजी जा रही थी। इन ग्रुपों में शामिल लोगों को आसानी से जानकारी मिली। बाकी ने इधर, उधर से पूछताछ करके जानकारी कर ही ली।