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आठ सौं मजरों को ‘सौभाग्य’ की रोशनी का इंतजार

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प्रधानमंत्री की सौभाग्य योजना से जिले के आठ सौ मजरों को ‘लालटेन’ युग से बाहर निकलने का इंतजार है। योजना के तहत जिले में सर्वे कराकर 2053 मजरों का चयन किया गया है। इसके बाद भी आठ सौ मजरे अभी भी छूटे हैं। इन गांवों में सौभाग्य योजना के तहत सर्वे तक नहीं हुआ।
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घर-घर बिजली पहुंचाने की सरकारी मंशा है। इसके लिए सौभाग्य योजना का संचालित की गई है। शासन की मंशा है कि कोई भी मजरा योजना से अछूता न रहे। लेकिन जिले में सरकार की यह मंशा अमलीजामा नहीं पहन पा रही। कौशाम्बी विकास खंड के मुस्तफाबाद के मजरा इटैलापर, रमपुरवा, कोशम इनाम के पुरवा हिसामबाद, तारा का पुरवा, बक्शी तलाब, चांदिकन, बिजया गांव की आधी बस्ती, अवाना आलमपुर की गड़री, बिदांव तथा गढ़वा सहित आठ सौ मजरों में विद्युतीकरण नहीं हो सका है। यह सब गांव अभी भी लालटेन के सहारे हैं। ग्रामीणों की शिकायत के बाद भी यहां पर योजना को लेकर कोई काम नहीं हुआ।

एक हिस्से में भी नहीं हो सका काम
मंझनपुर। सौभाग्य योजना के तहत चयनित गांवों में भी बिजली विभाग का काम अधूरा पड़ा है। गांवों में पोल तो गाड़ दिए गए लेकिन करंट आज तक नहीं दौड़ाया गया। इसके चलते ग्रामीणों को सुविधा का लाभ नहीं पा रहा है। वह लोग आज भी लालटेन या ढिबरी के सहारे जिंदगी बसर कर रहे हैं।
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सांसद के भरोसे आठ सौ मजरे
मंझनपुर। बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता सुशील कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि जिले के आठ सौ मजरे अभी भी सौभाग्य योजना से अछूते हैं। यह वह मजरे हैं जिनका चयन योजना के तहत नहीं हो सका। इसके लिए सांसद विनोद सोनकर को पत्राचार किया गया है।
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