कांवड़ के तराजूनुमा पलड़ों में दादा-दादी को बैठाया। गंगाजल बांधा और कांवड़ यात्रा पर गंतव्य के लिए रवाना हो गए। सुबह के समय कांवड़ लेकर पौत्र व परिजन निकले। 110 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करके गंतव्य तक पहुंचेंगे। पौत्र जितेंद्र कुमार ने बताया कि उनके दादा मुंशीराम फालेज मार चुकी है।
बताया कि दादी स्वस्थ हैं। दादा गंगा स्नान को नहीं आ सकते थे। तो उनकी इच्छा थी कि कंधों पर बैठाकर दादा को गंगा स्नान और कांवड़ यात्रा कराएंगे। इसी संकल्प के चलते उन्हीं के आर्शीवाद से यात्रा कर रहे हैं। भगवान भोलेनाथ के मंदिर में गंगाजल से दादा-दादी व परिवार के सभी लोगों के साथ मिलकर अभिषेक करेंगे।