कासगंज। जिले में खराब होती हवा और बदलती जीवनशैली का असर अब लोगों की सांसों पर साफ दिखाई देने लगा है। अस्पतालों में रोजाना ऐसे मरीजों की भीड़ बढ़ रही है, जो सांस फूलने और सीने में जकड़न की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। विश्व अस्थमा दिवस पर डॉक्टरों ने इसे गंभीर संकेत बताते हुए समय रहते सावधानी बरतने की अपील की है। अस्थमा के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। यह समस्या अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि युवा और बच्चे भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। इन दिनों जिला अस्पताल में 200 से 250 तक मरीज प्रतिदिन सांस की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। प्रतिदिन 15 से 20 मरीजों को भर्ती करना पड़ रहा है।
डॉ. कर्मवीर सिंह के अनुसार अस्थमा एक ऐसा श्वसन रोग है, जो धीरे-धीरे विकसित होता है, लेकिन अचानक गंभीर रूप ले सकता है। कई बार मरीज शुरुआती लक्षणों को हल्के में लेते हैं, जिससे स्थिति बिगड़ जाती है। यही लापरवाही बाद में जानलेवा भी साबित हो सकती है। अस्थमा के पीछे पर्यावरण और जीवनशैली दोनों ही बड़े कारण हैं। धूल, धुआं और प्रदूषण के अलावा धूम्रपान इसकी सबसे बड़ी वजह बनकर सामने आ रहा है। इसके साथ ही ठंडी हवा, एलर्जी जैसे पोलिन या पालतू जानवरों के बाल, संक्रमण और मानसिक तनाव भी अस्थमा के दौरे को बढ़ा सकते हैं।
लक्षणों को पहचानें, शुरू करें उचित इलाज
अगर समय रहते इसके लक्षणों को पहचाना जाए और उचित इलाज शुरू किया जाए, तो अस्थमा को नियंत्रित किया जा सकता है। लेकिन लापरवाही और गलत आदतें इस बीमारी को तेजी से बढ़ा रही हैं, जो आने वाले समय में और बड़ी चुनौती बन सकती है क्या होता है। अस्थमा के दौरान फेफड़ों की वायुमार्ग में सूजन आ जाती है। इससे बलगम (म्यूकस) का स्तर बढ़ जाता है और वायुमार्ग की मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं। नतीजतन, हवा का प्रवाह बाधित होता है और मरीज को सांस लेने में कठिनाई होती है। कई मामलों में यह समस्या अचानक बढ़कर गंभीर स्थिति पैदा कर देती है।
बचाव के उपाय...
- धूल और धुएं से दूरी बनाएं
- धूम्रपान से परहेज करें
- बाह निकलते समय मास्क का उपयोग करें
- घर की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें
- हल्का नियमित व्यायाम अपनाएं
- डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं का समय पर सेवन करें
अस्थमा के लक्षण...
- सांस फूलना
- सीटी जैसी आवाज के साथ सांस लेना
- सीने में जकड़न
- खांसी (खासकर रात या सुबह)