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विश्व गठिया दिवस : दर्द को उम्र का असर समझना पड़ सकता है भारी

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कासगंज। घुटनों या शरीर के अन्य जोड़ों में लगातार दर्द को बढ़ती उम्र का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। गठिया अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है। जिले में 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।
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जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 25 से 30 मरीज जोड़ों के दर्द और गठिया संबंधी शिकायतों को लेकर पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार, समय पर जांच और उचित उपचार से बीमारी के प्रभाव को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
जोड़ों में लगातार दर्द, सूजन या अकड़न होने पर खुद से दवा लेने के बजाय विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। गठिया के कई प्रकार होते हैं और उनके कारण व उपचार भी अलग-अलग हैं। बिना चिकित्सकीय सलाह लंबे समय तक दर्द निवारक दवाओं का सेवन नुकसानदेह हो सकता है।
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यह हैं लक्षण
-जोड़ों में लगातार या बार-बार दर्द होना
-जोड़ों में सूजन, गर्माहट या संवेदनशीलता
-सुबह उठने पर अकड़न या जकड़न महसूस होना
-चलने-फिरने और रोजमर्रा के कामों में परेशानी
-हाथ-पैर के जोड़ों की गति प्रभावित होना


बचाव के उपाय
वजन नियंत्रित रखें और नियमित हल्का व्यायाम करें
लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से बचें
संतुलित और पौष्टिक आहार लें
जोड़ों पर अनावश्यक दबाव न डालें
लगातार दर्द या चोट होने पर डॉक्टर से सलाह लें
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ये होती हैं जांच
सीबीसी (पूर्ण रक्त गणना), ईएसआर (सूजन का संकेत), सीआरपी (सी-रिएक्टिव प्रोटीन), रूमेटाइड फैक्टर, एंटी-सीसीपी एंटीबॉडी, सीरम यूरिक एसिड, एचएलए-बी27, जोड़ों का एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड या एमआरआई


वर्जन
जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 25 से 30 मरीज जोड़ों के दर्द और गठिया संबंधी शिकायत लेकर पहुंचते हैं। एचएलए-बी27 जांच अस्पताल में उपलब्ध नहीं है। बाहर निजी केंद्रों पर यह जांच काफी महंगी पड़ती है। - डॉ. संजीव सक्सेना, सीएमएस, जिला अस्पताल
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