सहावर। फर्जी दस्तावेज के जरिए होने वाली जमीनों की खरीद-फरोख्त पर लगाम कसने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने एक कड़ा और अहम कदम उठाया है। योगी सरकार द्वारा विधानसभा में स्टांप एवं पंजीयन विभाग से जुड़े दो महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए जाने के बाद अब रजिस्ट्री कार्यालयों में संपत्ति के केवल मूल्य, सर्किल रेट या राजस्व पहलुओं की ही नहीं, बल्कि विक्रेता के असली मालिकाना हक की भी जांच की जाएगी।
अब तक संपत्ति के मालिक की पड़ताल करना पूरी तरह खरीदार की जिम्मेदारी होती थी, जिसका फायदा उठाकर अक्सर शातिर लोग फर्जीवाड़े को अंजाम देते थे। नए प्रावधानों के लागू होने से ऐसे मामलों पर प्रभावी रोक लगने की उम्मीद है। संपत्ति की रजिस्ट्री के दौरान ओनरशिप जांच के इन नए नियमों को लेकर बुधवार को सहावर तहसील परिसर में दिनभर गर्मागर्म चर्चाएं होती रहीं।
बैनामा कराने पहुंचे तमाम लोगों ने इस नई व्यवस्था का स्वागत करते हुए कहा कि इससे फर्जी दस्तावेज के आधार पर होने वाली ठगी रुकेगी। हालांकि, इसके साथ ही लोगों ने रजिस्ट्री प्रक्रिया के लंबी और जटिल होने की आशंका भी जताई है। लोगों ने सरकार से मांग की है कि इस पूरी व्यवस्था को बेहद सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए।
नए प्रावधानों के तहत अब किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री से पहले विक्रेता के मालिकाना हक से जुड़े अभिलेखों का बारीकी से परीक्षण किया जाएगा। यदि दस्तावेज से संपत्ति का स्वामित्व पूरी तरह स्पष्ट नहीं होता है, तो संबंधित उप निबंधक को उस रजिस्ट्री को रोकने का पूर्ण अधिकार होगा।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि व्यवस्था का उद्देश्य और मंशा बेहद सराहनीय है, लेकिन यदि जांच प्रक्रिया लंबी खिंची, तो लोगों को तहसील के बार-बार चक्कर काटने पड़ेंगे और जरूरी कार्यों में देरी होगी।
क्या बोले लोग
यदि जांच प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं रही तो भ्रष्टाचार होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। अनावश्यक आपत्तियां लगाकर लोगों को परेशान किया जा सकता है। सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिससे जांच भी हो और लोगों को अनावश्यक दिक्कत भी न उठानी पड़े। - रविकांत चौहान
कई लोग आर्थिक जरूरत के समय अपनी जमीन बेचते हैं। यदि जांच में अधिक समय लगेगा तो जरूरतमंद लोगों को परेशानी होगी। सरकार को चाहिए कि पूरी प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और तय समय में पूरी हो, ताकि लोगों के जरूरी काम प्रभावित न हों। - मुशरफ अली
फोटो 26 - रविकांत चौहान। स्रोत : संवाद