कासगंज। शादी-ब्याह और अन्य मांगलिक कार्यों की योजना बना रहे लोगों के लिए जुलाई का दूसरा पखवाड़ा अहम होने वाला है। ज्योतिषियों के अनुसार, 15 जुलाई से गुरु ग्रह के अस्त होने और 25 जुलाई से देवशयनी एकादशी के साथ चतुर्मास शुरू होने के कारण अगले चार महीनों तक शादियों और मांगलिक कार्यों पर पूरी तरह रोक लग जाएगी। इसके बाद शहनाइयों की गूंज सीधे 20 नवंबर को देवोत्थान एकादशी पर भगवान विष्णु के जागने के बाद सुनाई देगी।
ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि गुरु ग्रह 15 जुलाई से अस्त हो जाएंगे और 12 अगस्त को वापस उदय होगा। हालांकि इसके बाद भी विवाह नहीं हो सकेंगे, क्योंकि 25 जुलाई से भगवान विष्णु के शयनकाल अर्थात चतुर्मास का आरंभ हो जाएगा। मान्यता है कि इस अवधि में मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं।
20 नवंबर को देवोत्थान एकादशी पर भगवान विष्णु के जगने के साथ ही विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों की शुरुआत होगी। ऐसे में नवंबर के अंतिम सप्ताह से विवाह समारोहों की रौनक लौटने की संभावना है। वहीं, 16 दिसंबर से खरमास शुरू होने के साथ मांगलिक कार्यों पर फिर विराम लग जाएगा।
ज्योतिषाचार्य भरतराम गौड़ का कहना है कि चतुर्मास को पूजा-पाठ, जप, तप, व्रत, दान और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। वहीं विवाह के लिए देवोत्थान एकादशी के बाद मिलने वाले शुभ मुहूर्तों का इंतजार करना होगा।
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महत्वपूर्ण तिथियां
15 जुलाई : गुरु अस्त
25 जुलाई : देवशयनी एकादशी, चतुर्मास प्रारंभ
12 अगस्त : गुरु उदय
20 नवंबर : देवोत्थान एकादशी, चतुर्मास समाप्त
16 दिसंबर : खरमास प्रारंभ, मांगलिक कार्यों पर पुनः विराम
साल के आखिरी विवाह मुहूर्त
नवंबर -21, 24, 25 और 26
दिसंबर 2, 3, 4, 5, 6, 11 और 12