कासगंज। केनरा बैंक के लॉकर से करीब सवा करोड़ रुपये के जेवर गायब होने का मामला विजिलेंस सेल तक पहुंच गया है। विजिलेंस सेल ने पीड़ित महीपाल सिंह से 9 मई तक साक्ष्य मांगे हैं। पीड़ित ने 28 फरवरी को सदर कोतवाली में एक नामजद बैंक कर्मी और अन्य अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
महीपाल सिंह ने 15 मई 2024 को अपने बेटे संजय और बेटी मधु यादव के नाम से लॉकर नंबर 66 लिया था। उन्होंने इसमें अपनी पत्नी और बेटी के 92 तोला सोने तथा पांच किलो चांदी के जेवर रखे थे। इन जेवरों की कीमत करीब सवा करोड़ रुपये है। महीपाल सिंह ने लॉकर में अपना एक निजी ताला भी लगाया था।
उनका आरोप है कि बैंक कर्मी लक्ष्मी ने उन्हें गलत चाबी दी थी। इस चाबी पर 66 के बजाय 42 नंबर लिखा हुआ था। 14 जनवरी 2026 को जब बेटा संजय बैंक पहुंचा तो लॉकर पर लगा निजी ताला गायब था। बैंक द्वारा दी गई चाबी से भी लॉकर नहीं खुला, जिसके बाद बैंक अधिकारियों से शिकायत की गई।
शिकायत के एक हफ्ते बाद 22 जनवरी को अलीगढ़ से अभियंता बुलाकर ताला तुड़वाया गया। इस दौरान बेटे संजय को भी बुलाया गया और वीडियोग्राफी भी कराई गई थी। ताला टूटने पर लॉकर से एक पर्स मिला, जिसमें 100 ग्राम का सोने का सिक्का और 28 मई 2024 की रसीद थी। यह सामान महीपाल सिंह का नहीं था, जबकि उनके जेवर गायब थे। बेटे ने तुरंत बैंक अधिकारियों को इसकी जानकारी दी और लिखित शिकायत की।
आरोप है कि शिकायत के बाद बैंक प्रबंधक 23 से 27 जनवरी तक छुट्टी पर चले गए। बैंक ने लॉकर तुड़वाने के अधूरे और संपादित वीडियो दिए हैं। इसके बाद 28 फरवरी को सदर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। पुलिस ने लॉकर से मिला सोना बैंक को वापस करा दिया, लेकिन अब तक मामले का खुलासा नहीं हुआ है। महीपाल सिंह का आरोप है कि बैंक कर्मियों ने मिलीभगत से जेवर चोरी किए हैं, और उनकी शिकायत अब केनरा बैंक की दिल्ली सतर्कता इकाई तथा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया तक पहुंच गई है।