फोटो04कासगंज में सड़क पर घूमते कुत्ते। संवाद
- फोटो : गिफ्ट गैलरी पर खरीदारी करती युवती। संवाद
कासगंज। बेसिक शिक्षा विभाग का एक आदेश परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों और शिक्षा जगत में हलचल मचा रहा है। शिक्षक केवल पढ़ाई ही नहीं कराएंगे, बल्कि स्कूल परिसरों और आसपास आवारा कुत्तों की निगरानी की जिम्मेदारी भी उन्हें दी गई है। इसके लिए नोडल अधिकारी भी तैनात किए जाएंगे, जिनका नाम और मोबाइल नंबर विद्यालय के मुख्य द्वार पर प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा।
जिले में कुत्तों के हमलों में बच्चे भी जख्मी होते हैं। शिक्षक और नोडल अधिकारी मिलकर ऐसे विद्यालयों की पहचान करेंगे जिनके आसपास निराश्रित कुत्तों का जमावड़ा रहता है। इसके बाद परिसर में व्यवस्था की जाएगी ताकि कुत्ते चहारदीवारी और गेट के पास न पहुंच पाएं।
नोडल अधिकारी विद्यालय परिसर की सफाई और रखरखाव के लिए भी जिम्मेदार होंगे। यदि कोई बच्चा या व्यक्ति कुत्ते के काटने से प्रभावित होता है तो नोडल अधिकारी नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल से संपर्क कर एंटी-रेबीज दवाओं और उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे।
उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश और उच्च न्यायालय में दाखिल जनहित याचिका के अनुपालन में, निराश्रित कुत्तों की पहचान, रोकथाम और नियंत्रण के लिए विभिन्न विभागों को जिम्मेदारी दी गई है। इसके तहत सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। - सूर्य प्रताप सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी