30 अक्तूबर, 1990 को पहली बार कारसेवकों पर गोलियों चलीं। गोली लगने से पांच की मौत हो गई थी। इसके बाद से अयोध्या से देशभर का माहौल गर्मा गया था। गोलीकांड के दो दिन बाद ही दो नवंबर को हजारों कारसेवक हनुमान गढ़ी के पास पहुंच गए। इस घटना के दो साल बाद छह दिसंबर, 1992 में विवादित ढांचे को गिरा दिया गया। सन् 1990 में हुए गोलीकांड के 23 साल बाद जुलाई 2013 में मुलायम सिंह ने एक बयान दिया था, इस बयान में उन्होंने कहा था कि उन्हें गोली चलवाने का अफसोस है, लेकिन उनके पास अन्य कोई विकल्प मौजूद नहीं था।