श्रद्धालुओं ने बताया कि प्रयागराज में भीड़ के चलते यातायात व्यवस्था भी गड़बड़ा गई है। लोगों को वापस लाैटने के लिए वाहन नहीं मिल रहे हैं। वाहन हैं तो सड़कों पर जाम लगा हुआ है।
मौनी अमावस्या पर संगम पर डुबकी लगाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु कुंभ गए थे। मौनी अमावस्या के स्नान से पहले ही रात के समय संगम पर हादसा हो गया। हादसे में काफी श्रद्धालुओं की मौत हो गई और कई गंभीर रूप से घायल हो गए। कासगंज से गए श्रद्धालु भी अफरातफरी के बीच फंस गए, लेकिन उन्होंने अपने आप को सुरक्षित कर लिया और दूसरों को भी सुरक्षा प्रदान की। श्रद्धालुओं का कहना था कि ऐसी स्थिति में संगम के बजाए अन्य स्थानों पर स्नान करना पड़ा।
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तीर्थनगरी सोरोंजी से छह श्रद्धालुओं की टोली कुंभ में पहुंची। टोली में शामिल सतीश भारद्वाज ने बताया कि वह कुंभ में 25 जनवरी को पहुंच गए थे और यहां कैलाश मठ के शिविर में रह रहे थे। उन्होंने कहा कि मौनी अमावस्या की रात को वह कुछ साधु संतों के साथ रात तीन बजे गंगा स्नान के लिए संगम पर गए तो वहां बेहद भयावह हालात थे।
महाकुंभ में गए श्रद्धालु।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हादसे के बाद अफरातफरी के हाल नजर आए। वहां मौजूद प्रशासन, अधिकारियों व पुलिस ने स्नान करने से रोक दिया। इस बीच कुंभ क्षेत्र में श्रद्धालु काफी डरे हुए थे। ऐसे तमाम श्रद्धालुओं की मदद की। उन्हें सहारा दिया। उन्होंने कहा कि हादसे के दाैरान ऐसे श्रद्धालु ज्यादा शिकार हुए जो अधिक सामान लेकर चल रहे थे।
तीर्थनगरी से पहुंचे श्रद्धालुओं का कहना है कि भीड़ इतनी अधिक थी कि इसका अनुमान लगाने में प्रशासन से चूक हो गई। प्रशासन ने कुंभ स्नान के लिए एक साइड की ओर स्नान करने के लिए घाट तैयार किए थे। यदि घाट दोनों साइड बने होते तो इस तरह के हालात नहीं बनते। उन्होंने बताया कि 25 जनवरी को सुबह से ही काफी भीड़ कुंभ क्षेत्र में थी।
सुबह करीब साढ़े दस बजे पीपा पुल को पार करने के लिए सेक्टर 15 में पुल की बेरिकेडिंग में श्रद्धालुओं के घुसने से हादसा हो गया और काफी लोग गिर गए, लेकिन वहां मौजूद पुलिस प्रशासन व युवा श्रद्धालुओं ने एक दूसरे की सहायता की एवं तत्काल ही घटना पर काबू पा लिया गया। कुंभ में व्यवस्थाओं की कमी नहीं है, लेकिन श्रद्धालुओं की भीड़ का जो दबाव है उसके आगे सभी व्यवस्थाएं बौनी साबित हो गईं।
सोरोंजी के लिए नहीं निकल पा रहे वापस
कुंभ मेले में हादसे के बाद वाहनों के आवागमन पर रोक है और कई रास्ते भी बंद कर दिए गए हैं, लेकिन अत्यधिक वाहन व भीड़ होने के कारण अभी यातायात सुचारू नहीं है। ऐसी स्थिति में श्रद्धालु यातायात सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं। तीर्थनगरी के श्रद्धालु हरिओम शास्त्री, भोलाशंकर चौधरी, सौरभ अग्रवाल, भूरा बड़गैया, हेमंत त्रिगुणायत का कहना है कि यातायात सामान्य हो तब घर वापसी के लिए निकलेंगे।