कासगंज। न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट ने पुलिस की लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए थाना सिकंदरपुर वैश्य के प्रभारी निरीक्षक को 24 घंटे के भीतर प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है। मामला सड़क हादसे से जुड़ा है, जिसमें तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने के कारण तीन लोगों की जान चली गई थी, लेकिन पुलिस लगातार प्राथमिकी दर्ज करने में टालमटोल कर रही थी।
न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश याचिका के अनुसार, हादसा 9 अप्रैल, 2026 का है। पीड़ित रामलड़ैते ने अदालत को बताया कि उसका भाई महाराज सिंह, मुकेश और राजेंद्र सिंह अन्य ग्रामीणों के साथ नगला बरा से अपने गांव लौट रहे थे। सभी लोग गांव के ही धर्मेंद्र के ट्रैक्टर की ट्रॉली में सवार थे। आरोप है कि धर्मेंद्र ट्रैक्टर को बेहद तेजी और लापरवाही से लहराते हुए चला रहा था। ग्रामीणों के बार-बार टोकने के बावजूद उसने रफ्तार कम नहीं की। ग्राम बहोरा के आगे लभेड मोड़ के पास ट्रैक्टर-ट्रॉली को पलट दिया। हादसे में महाराज सिंह (60), मुकेश (50) और राजेंद्र (45) की मौके पर ही ट्रॉली के नीचे दबकर मौत हो गई। जबकि तीन लोग घायल हो गए।
हादसे के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शवों का पोस्टमार्टम तो कराया, लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं की। पीड़ित जब अपने भाई के अंतिम संस्कार के बाद 24 अप्रैल, 2026 को सिकंदरपुर वैश्य थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने पहुंचा तो पुलिस ने उसकी तहरीर रख ली मगर प्राथमिकी दर्ज नहीं की। पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक को रजिस्टर्ड डाक के जरिए प्रार्थना पत्र भेजा, लेकिन वहां से भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। तब पीड़ित को न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
मामले की सुनवाई के दौरान थाना सिकंदरपुर वैश्य से रिपोर्ट मांगी गई। थाने से प्राप्त आख्या में पुलिस ने यह तो स्वीकार किया कि 9 अप्रैल को ट्रैक्टर पलटने की सूचना मिली थी और हादसे में तीन लोगों की मौत हुई थी तथा तीन लोग घायल हुए थे, लेकिन पुलिस रिकॉर्ड में इस संबंध में कोई भी प्राथमिकी पंजीकृत नहीं पाई गई।
न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पीड़ित की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और तस्वीरों का अवलोकन करने के बाद माना कि मामला गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है, जिसकी विस्तृत जांच जरूरी है। अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा-173 (4) के तहत पीड़ित के प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि थानाध्यक्ष सिकन्दरपुर वैश्य आदेश की प्रति मिलने के 24 घंटे के भीतर संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज करें और इसकी रिपोर्ट न्यायालय में पेश करें।