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Kasganj News: अब किताब नहीं, तकनीक भी सिखाएगी पाठ

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कासगंज। उत्तर प्रदेश सरकार ने नए शैक्षिक सत्र में परिषदीय विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव किए हैं। पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ डिजिटल लर्निंग, परामर्श सत्र और गतिविधि-आधारित शिक्षण पर विशेष बल दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य न केवल बच्चों के शैक्षणिक स्तर को सुधारना है, बल्कि उनके मानसिक और सर्वांगीण विकास को भी सुनिश्चित करना है।
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नए सत्र से कक्षा छह से आठ तक के विद्यार्थियों के लिए अब सप्ताह में कम से कम एक पीरियड डिजिटल लर्निंग के लिए अनिवार्य कर दिया गया है। इस ''डिजिटल लर्निंग'' पीरियड में ''निजी एकेडमी'' के डिजिटल संसाधनों का उपयोग किया जाएगा, जिससे बच्चों को नवीनतम शैक्षिक सामग्री और विधियों से जोड़ा जा सके।
बच्चों को मजबूत शैक्षिक आधार प्रदान करने के लिए, प्राथमिक स्तर पर भाषा और गणित पर दैनिक ध्यान केंद्रित किया जाएगा। वहीं, उच्च प्राथमिक स्तर पर गणित, विज्ञान और अंग्रेजी विषयों के लिए भी रोजाना एक-एक पीरियड निर्धारित किया गया है। मिड-डे मील के लिए 30 मिनट का विशेष समय तय किया गया है, ताकि बच्चों को एक व्यवस्थित दिनचर्या मिल सके और वे बिना किसी हड़बड़ी के भोजन कर सकें।
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कमजोर छात्रों को मुख्यधारा में लाने के लिए भी विशेष योजना बनाई गई है। अर्धवार्षिक परीक्षा में 50 फीसदी से कम अंक पाने वाले विद्यार्थियों को चिह्नित कर उनकी अतिरिक्त कक्षाएं संचालित की जाएंगी। इसके साथ ही ''नया सवेरा'' कार्यक्रम के तहत सप्ताह में दो दिन शिक्षा अधिकारी विद्यालयों की प्रार्थना सभा में शामिल होंगे और बच्चों को जीवन मूल्य, अनुशासन और सकारात्मक सोच के लिए प्रेरित करेंगे। सफल व्यक्तियों और पूर्व छात्रों को भी स्कूलों में बुलाकर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन कराया जाएगा।


शनिवार को होगी मस्ती की पाठशाला
शैक्षिक कैलेंडर में केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि बच्चों के मानसिक, भावनात्मक और व्यवहारिक विकास पर भी गहन जोर दिया गया है। इसके तहत स्कूलों में नियमित परामर्श (काउंसिलिंग) सत्र आयोजित किए जाएंगे। हर शनिवार को ''मस्ती की पाठशाला'' के रूप में ''बैगलेस डे'' मनाया जाएगा। इस दिन बच्चे स्कूल में अपना बैग नहीं लाएंगे। उन्हें विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों, खेलकूद, भाषण प्रतियोगिताओं, वाद-विवाद, पिकनिक, समूह गतिविधियों, कला, शिल्प, विज्ञान प्रयोगों और प्रकृति आधारित अनुभवों से जोड़ा जाएगा।
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