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Kasganj News: नदी किनारे छिपाई थी पत्नी की लाश, पांच साल बाद मिला न्याय

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कासगंज। पत्नी की हत्या कर शव को नदी किनारे छिपाने के करीब पांच साल पुराने मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनुतोष कुमार शर्मा के न्यायालय ने बुधवार को दोषियों को सजा सुनाई। न्यायालय ने पति परमवीर को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और अर्थदंड से दंडित किया। वहीं शव छिपाने में सहयोग करने वाले चार अन्य दोषियों को तीन-तीन वर्ष के साधारण कारावास और पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। जबकि दो आरोपियों की मौत हो चुकी है।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार, थाना सदर कोतवाली में 26 अप्रैल 2020 को राजेश कुमार निवासी सिरोली थाना ढोलना ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। तहरीर में बताया गया था कि उसकी बहन गीता की शादी वर्ष 2011 में नगला शीशम निवासी परमवीर के साथ हुई थी। आरोप था कि पति और ससुरालीजन आए दिन उसके साथ मारपीट करते थे।
25 अप्रैल 2020 की रात गीता ने अपने मायके फोन कर पेट दर्द होने की जानकारी दी थी। इसके बाद परिजन को उसकी मौत की सूचना मिली। परिजन ने आरोप लगाया कि हत्या के बाद ससुरालीजन शव को ठिकाने लगाने के उद्देश्य से नदी किनारे ले गए और वहां छिपा दिया। पुलिस ने मामले में पति परमवीर, हरीसिंह, रिंकू, सोमवीर, सुभाष, नीलेंद्र, रक्षपाल और उर्मिला के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।
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पुलिस ने विवेचना के दौरान नदी किनारे एक गड्ढे से पत्तियों से ढका गीता का शव बरामद किया था। इसके बाद साक्ष्य जुटाकर पुलिस ने रक्षपाल को छोड़कर अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान आरोपी सुभाष और नीलेंद्र की मौत हो गई। न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर पति परमवीर को हत्या और शव छिपाने का दोषी पाया गया। न्यायालय ने उसे धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा 201/149 के तहत तीन वर्ष के साधारण कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
वहीं, हरी सिंह, रिंकू, सोमवीर और उर्मिला को धारा 201/149 के तहत तीन-तीन वर्ष के साधारण कारावास और पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया। अर्थदंड जमा न करने पर दोषियों को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने जेल में बिताई गई पूर्व अवधि को सजा में समायोजित करने के आदेश दिए हैं। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
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