कासगंज। फास्ट फूड, तली-भुनी चीजों और अनियमित दिनचर्या का असर अब लिवर की सेहत पर भी नजर आने लगा है। जिला अस्पताल में हर माह करीब छह हजार मरीजों की लिवर फंक्शन टेस्ट (एलएफटी) जांच हो रही है। इनमें लगभग 25 फीसदी मरीजों की एसजीपीटी और एसजीओटी के स्तर में गड़बड़ी मिल रही है। वहीं, अल्ट्रासाउंड जांच कराने वाले मरीजों में करीब पांच फीसदी में फैटी लीवर के संकेत सामने आ रहे हैं।लीवर शरीर में भोजन के पाचन, पोषक तत्वों के प्रसंस्करण और हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाता है। लंबे समय तक अधिक कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों का सेवन और व्यायाम की कमी फैटी लिवर की समस्या बढ़ा सकती है। इसकी शुरुआती अवस्था में अक्सर स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। ऐसे में संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और वजन नियंत्रित रखना जरूरी है। एसजीपीटी और एसजीओटी के स्तर में बढ़ोतरी लिवर की परेशानी का संकेत हो सकती है, लेकिन इसकी वजह जानने के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
संभावित लक्षण
थकान और कमजोरी।
पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में असहजता।
शुरुआती अवस्था में कोई स्पष्ट लक्षण न दिखना।
बचाव के उपाय
संतुलित आहार लें और फल-सब्जियां खाएं।
जंकफूड, तली चीजों और मीठे पेय का सेवन सीमित करें।
नियमित व्यायाम करें और वजन नियंत्रित रखें।
बिना चिकित्सकीय सलाह दवाएं न लें और जरूरत पड़ने पर जांच कराएं।
वर्जन
लीवर को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार लेना, नियमित व्यायाम करना और वजन नियंत्रित रखना जरूरी है। जंकफूड, तली-भुनी चीजों और मीठे पेय का सेवन सीमित करना चाहिए। जांच रिपोर्ट में आने वाले आंकडे़ चिंता जनक हैं- डॉ. संजीव सक्सेना, सीएमएस