कासगंज। दिनेश यह नाम उस संघर्ष है, जिसने मेहनत के बूते चार साल में गांव की पगडंडी से नेशनल एथलीट तक का सफर तय कर लिया। सोरोंजी के छोटे से गांव होडलपुर से निकलकर 24वीं नेशनल जूनियर एथलेक्टिस फेडरेशन प्रतियोगिता में 5000 मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल हासिल किया। अब जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए नासिक में जमकर पसीना बहा रहे हैं।
दिनेश सोरोंजी के गांव होडलपुर निवासी किसान वेदराम और पार्वती देवी के बेटे हैं। उनके संघर्ष की कहानी भी काफी प्रेरक करने वाली है। दिनेश बताते हैं कि चार साल पहले 2022 में गांव की पगडंडी से दौड़ का सफर शुरू हुआ। उस वक्त न तो अच्छे रनिंग शूज के लिए पैसे थे और न ही बेहतर डाइट के। छोटे बच्चों को कोचिंग पढ़ाकर कुछ रुपये मिल जाते थे। कुछ परिजन दे देते थे।
बड़े भाई हरीओम ने हौसला बढ़ाया तो सोरोंजी के स्टेडियम में कोच हीरा सिंह के मार्गदर्शन में प्रोफेशनल प्रैक्टिस शुरु कर दी, लेकिन कुछ समय बाद उनका अलीगढ़ तबादला हो गया।
ट्रांसफर होने के बावजूद कोच ने उनका साथ नहीं छोड़ा। केए पीजी कॉलेज में फिजिकल एजुकेशन के शिक्षक डॉ. प्रवीन जादौन की मदद से उसे साल 2024 में बेहतर प्रैक्टिस के लिए नासिक भिजवा दिया। जहां कोच मान चौधरी के नेतृत्व में उन्होंने फिर से प्रैक्टिस शुरू की।
उनकी मेहनत का नतीजा निकला कि राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में उन्हें प्रतिभाग करने का मौका मिलने लगा। उन्होंने बीती 24 से 26 अप्रैल तक कर्नाटक के तुमकुरु में महात्मा गांधी स्टेडियम में आयोजित 24वीं नेशनल जूनियर एथलेक्टिस फेडरेशन प्रतियोगिता में 5000 मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल हासिल किया।
यह प्रतियोगिता एशियाई अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप के चयन के लिए कराई गई थी। हालांकि, कुछ सेकेंड की टाइमिंग से वह एशियन गेम्स के लिए क्वालीफाई नहीं कर सके। अब वह जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए नासिक में जमकर पसीना बहा रहे हैं। इसके लिए पंजाब के लिए लुधियाना में 13 जून को ट्रायल होने हैं। इसके अलावा दिल्ली में नेवी की ओर से आयोजित हाफ मैराथन में वह गोल्ड मेडल जीत चुके हैं।
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देश के लिए मेडल जीतना है सपना
दिनेश ने बताया कि उनका सपना देश के लिए मेडल जीतना है। इसके लिए वह लगातार मैदान पर पसीना बहा रहे हैं। वह बताते हैं कि अभी 5000 हजार मीटर की दौड़ में उनकी टाइमिंग 14 मिनट 20 सेकेंड निकल रही है। जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्वालीफाई करने के लिए 14 मिनट 9 सेकेंड से कम टाइमिंग होनी चाहिए। इसलिए वह टाइमिंग कम करने पर काम कर रहे हैं। ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिल सके।
फोटो 41 - दिनेश। स्रोत : स्वयं