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UP:  सोरोंजी में आस्था का सैलाब, दूरदराज से उमड़ी कांवड़ियों की भीड़; भक्तिमय छटा में रंगी तीर्थ नगरी

Wed, 11 Feb 2026 08:17 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज

सार

तीर्थ नगरी सोरोंजी में कांवड़ियों की भीड़ उमड़ना जारी है। तीर्थ नगरी से शुरू होकर आस्था का यह सैलाब कासगंज से होकर जब गुजरता है तो हाथों में गंगाजल से भरी कांवड़ें, आंखों में श्रद्धा और गले में भक्ति के जप का स्वर यह दृश्य हर किसी का मन मोह रहा है।
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कांवड़ यात्रा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सोरोंजी पवित्र तीर्थ नगरी इन दिनों भक्तिमय वातावरण में सराबोर है। महाशिवरात्रि का पावन पर्व नजदीक आते ही कांवड़ियों का तांता लगने लगा है। राजस्थान, मध्यप्रदेश और प्रदेश के दूर-दराज इलाकों से आए श्रद्धालु अपने मन और आत्मा को भोलेनाथ की भक्ति में डुबोकर कांवड़ भरने की परंपरा निभा रहे हैं। लहरा घाट से शुरू हो रहा गंगाजल लाने का पावन सफर चल रहा है।
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परिवहन निगम की बसों और निजी वाहनों से तीर्थनगरी में प्रवेश करते ही कांवड़ियों के चेहरे पर उल्लास और भक्ति झलक रही है। कांवड़ियों ने तीर्थ नगरी पहुंच कर कासगंज गेट, चंदन चौक और होडलपुर मेला परिसर में जाकर कांवड़ और सजावट का सामान खरीदा। इसके बाद कांवड़ियों ने लहरा घाट पर गंगा स्नान के बाद गंगाजल भरा। जयकारों के साथ प्राचीन लहरेश्वर महादेव मंदिर की ओर रुख किया। यहां उन्होंने मत्था टेका, हरि की पौड़ी की परिक्रमा की और क्षेत्राधीश वराह भगवान के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

सोरोंजी की गलियां और घाट इस पावन अवसर पर भक्तिमय भव्यता से गूंज रहे हैं। हर कांवड़ में श्रद्धा का भार है, हर कदम में भक्ति की गूंज है और हर हृदय में भोलेनाथ के प्रति अपार विश्वास है। तीर्थ नगरी से शुरू होकर आस्था का यह सैलाब कासगंज से होकर जब गुजरता है तो हाथों में गंगाजल से भरी कांवड़ें, आंखों में श्रद्धा और गले में भक्ति के जप का स्वर यह दृश्य हर किसी का मन मोह रहा है।
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कांवड़ियों की बात
फाल्गुन मास में गंगा स्नान कर लहरा घाट का जल भरकर ले जाते हैं, शिव परिवार का महाशिवरात्रि पर अनुष्ठान करने में इस पवित्र जल को प्रयोग में लाते हैं। भिंड यहां से 320 किलोमीटर दूर है। रात दिन पैदल चलकर सफर भोले बाबा की कृपा से पूर्ण हो जाएगा। -ओमप्रकाश, भिंड

अपने गांव के आठ साथियों के साथ प्रथम बार गंगाजल लेने तीर्थनगरी आए हैं। भोले बाबा के आर्शीवाद से साथियों के साथ कांवड़ भरने आए हैं। प्राचीन भोलेनाथ के मंदिर पर जल चढ़ाएंगे। -मुकेश कुमार, गोवर्धन
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