फोटो42ढोलना कोतवाली में गांव छावनी के लोगों से वार्ता करते कोतवाली प्रभरी निरीक्षक।स्रोत: प
कासगंज। ढोलना के गांव छावनी में बिना अनुमति डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करने पर सोमवार को विवाद हो गया। सोशल मीडिया पर मामला वायरल होने के बाद पुलिस-प्रशासन हरकत में आया। प्रकरण में एक उपनिरीक्षक को निलंबित कर दिया गया जबकि ग्राम प्रधान सहित एक अन्य के खिलाफ शांति भंग की कार्रवाई की गई है।
गांव छावनी में एक पुराने कुएं पर लोग शादी के समय पूजा करते हैं। वहां एक चबूतरा है। आरोप है कि हरीशंकर उर्फ भोले ग्राम प्रधान रामदास के सहयोग से बिना अनुमति के डॉ. आंबेडकर और भगवान बुद्ध की प्रतिमा लगाना चाहते थे। दो माह पहले सौंदर्यीकरण के बहाने निर्माण कार्य शुरू हुआ था। तब राजस्व टीम और पुलिस ने इसे रुकवा दिया था। रविवार को ग्राम प्रधान और हरीशंकर ने कुएं की जगह पर दो तरफ दीवारें बनवाईं। एक ग्रामीण ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।
सोमवार सुबह 8:50 बजे सीओ सदर आंचल चौहान और नायब तहसीलदार संदीप कुमार मौके पर पहुंचे। उन्होंने लोगों को समझाकर मामला शांत कराया। ढोलना थाना प्रभारी जगदीश चंद्र ने बताया कि ग्राम प्रधान रामदास और हरीशंकर को हिरासत में लेकर शांति भंग की कार्रवाई की गई है। सदर एसडीएम संजीव कुमार ने स्पष्ट किया कि बिना प्रशासनिक अनुमति के कोई प्रतिमा नहीं लगाने दी जाएगी। ग्रामीणों ने स्वयं ही लगाई गई दीवारों को हटा दिया है।
लापरवाही पर उपनिरीक्षक निलंबित
पुलिस मीडिया सेल के अनुसार, उपनिरीक्षक संदीप वर्मा ने आंबेडकर प्रतिमा लगाए जाने की तैयारी की सूचना उच्चाधिकारियों को समय पर नहीं दी। इससे गांव में अनावश्यक विवाद और तनाव उत्पन्न हुआ। कर्तव्य पालन में लापरवाही और उदासीनता बरतने के आरोप में पुलिस अधीक्षक ओम प्रकाश सिंह ने उन्हें निलंबित कर दिया।