उत्तर प्रदेश में दलित लेखक कंवल भारती का मानना है कि आगामी चुनाव में यदि मोदी के पक्ष में परिस्थितियां बनती हैं तो यह देश का दुर्भाग्य होगा।
उनका मानना है भाजपा लोकतंत्र में विश्वास नहीं करती है। ऐसा होता तो गुजरात में वह नहीं होता जो हुआ।
राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में तुलनात्मक दृष्टि से कांग्रेस, बीजेपी से बेहतर है। फिलहाल मोदी के पास कोई बेहतर मॉडल नहीं दिखता। सिर्फ सड़क, बिजली, पानी ही नहीं सामाजिक सरोकार और सुरक्षा भी विकास के दायरे में होनी चाहिए। निजीकरण और सांस्कृतिक क्षेत्र में भी मोदी का विजन स्पष्ट नहीं है।
रचनाकारों का समर्थन जुटाने आए, प्रदेश की सपा सरकार का कोपभाजन बने कंवल ने ‘अमर उजाला’ से खास मुलाकात में सपा, बसपा दोनों को आडे़ हाथों लिया।
उन्होंने कहा कि बीएसपी की आर्थिक नीतियां कभी भी दलितों के हित में नहीं रहीं। बसपा ने शिक्षा का निजीकरण करने के साथ ही प्राथमिक शिक्षा का सत्यानाश कर दिया। वहीं जब भी सपा सत्ता में आती है, उसका रवैया दलित विरोधी ही होता है।
उन्होंने कहा कि मुझे दलित और कमजोर समझने के साथ ही मुमकिन है, आजम खां ने बसपा का भी समझ लिया होगा जबकि मेरा न बसपा और न ही किसी अन्य राजनीतिक दल से कोई वास्ता है। मैंने कांशीराम और मायावती के खिलाफ किताबें लिखीं हैं। आजम खां ने मुझे पढ़ा ही नहीं है।