एटा। कमजोर मानसून के चलते जिले में सूखे का संकट गहराने लगा है। सूखे की स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन और कृषि विभाग तैयारियाें में जुट गया है। कृषि विभाग भी देरी से आने वाले मानसून की आहट से कम समय में पैदा होने वाली फसलों की बुवाई की तैयारी कर रहा है।
बता दें कि जिले में मानसून की लेट-लतीफी के चलते आधी से ज्यादा जमीन पर बुवाई नहीं हो सकी है। उदाहरण के तौर पर कृषि विभाग ने मक्का के लिए जिले में लगभग 28 हजार हेक्टेयर का रकबा रखा था, जो अब तक 10 हजार हेक्टेयर तक ही पहुंच पाया है, लेकिन हकीकत यह है कि मक्का की बुवाई जिले में 15 जून से शुरू हो जाती है और स्थानीय किसान पांच जुलाई के बाद मक्का की बुवाई करने में हिचकिचाते हैं। इन सब के चलते ही अब कृषि विभाग किसानों को बाजरा की बुवाई के लिए प्रेरित कर रहा है। विभाग के अनुसार बाजरा की फसल 85 दिनों में तैयार हो जाती है। किसान इसकी बुवाई भी 15 जुलाई से शुरू कर 15 अगस्त तक करता है। तब तक मानसून के मजबूत होने की भी संभावना है।
मानसून के कमजोर पड़ने की दशा में सिंचाई के लिए नलकूप विभाग को सभी नलकूपों को सही तरह से संचालित करने के निर्देश दिए हैं। लापरवाही बरतने पर संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। विद्युत विभाग को भी ग्रामीण क्षेत्रों में फुंके ट्रांसफार्मर बदलने व ट्रिपिंग की समस्या को दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।
- साहब सिंह, मुख्य विकास अधिकारी।
मानसून में देरी को देखते हुए कृषि विभाग द्वारा किसानों को कम समय में पैदा होने वाली फसलों की बुवाई करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
- जीसी कटियार, उप कृषि निदेशक एटा।