सोरों। दूध के नाम पर खुलेआम लोगों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। मिलावटखोर नौनिहाल से बुजुर्गों तक को दुध के नाम पर हानिकारक रसायन और डिटर्जेंट पिला रहे हैं। इस जहर की कीमत भी वह 40 से लेकर 45 रुपये प्रति लीटर लोगों से वसूल रहे है। इस कृत्रिम दूध का सेवन करके लोग पेट व लिवर की जानलेवा बीमारियों की चपेट में आ रहे है।
गौरतलब हो कि कस्बे के आसपास के गांवों में बडे़ पैमाने पर सिंथेटिक दूध का काला कारोबार चल रहा है। इस दूध के निर्माण के लिए महुआ, सोयाबीन का तेल, ग्लूकोज व ईजी वाश्ंिाग पाउडर मिलाकर दूध का रूप दिया जा रहा है। इसी दूध को दूधिया कस्बों के लोगों को बिक्री के लिए ले जाते है।
रसायन शास्त्री नितिन कुमार राठौर का कहना है कि कृत्रिम दूध व असली दूध में अंतर करना बहुत मुश्किल होता है केवल लेबोरेटरी परीक्षण द्वारा ही इसका पता लगाया जा सकता है।
चिकित्सक डा. वीपी माहेश्वरी ने कहा इस दूध के प्रयोग से शरीर बीमारियाें की चपेट में आएगा। नौनिहालों के हड्डियों के पोषण के लिए आवश्यक दूध न मिलने से उनके शरीर का विकास रुक जाएगा और मानसिक रूप से भी अपंग होने की उनमें संभावना बढ़ जाएगी। इस दूध का निरंतर सेवन करने से लीवर डेमेज होने की संभावना बढ़ जाती है। सामाजिक संस्था संत तुलसीदास नगर विकास समिति ने सदस्य पंकज पाराशरी, विनीत कुमार चौधरी, मनोज मिश्र, मनोज कुमार गोस्वामी, आशीष कोठेवार ने जिला प्रशासन से सिंथेटिक दृध के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई किए जाने की मांग की।